दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को बेंगलुरु में हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लिया. राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र में रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह आईओआर सम्मेलन एक संस्थागत और सहकारी वातावरण में संवाद को बढ़ावा देने के लिए एक पहल है. जोकि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के विकास को बढ़ावा दे सकता है.
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सबसे बड़ा देश है और भारत की 7,500 किलोमीटर की विशाल तट रेखा है. हिंद महासागर क्षेत्र के सभी देशों के शांतिपूर्ण और समृद्ध सह-अस्तित्व के लिए भारत को सक्रिय भूमिका निभानी है. भारत सरकार ने हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां और पहल की हैं, जैसे सागरमाला, प्रोजेक्ट मौसम और एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर आदि.
आरएमओ ट्विटर के मुताबिक, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले देशों के बीच सुरक्षा, वाणिज्य, कनेक्टिविटी, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग विदेशी कंपनियों के लिए एक आकर्षक और महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र वर्तमान में समुद्री सुरक्षा परिदृश्य कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. जिसमें समुद्री डकैती, ड्रग्स, हथियारियों की तस्करी के अलावा अन्य चुनौतियों का सामना कर रहा है. आईओआर देशों के बीच सहयोग से इन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद मिल सकती है.
इसलिए, हमें इन खतरों को एक साथ देखना हो होगा और हाथ मिलाना होगा, क्योंकि आज एक का खतरा दूसरे का कल हो सकता है. समुद्री संसाधन, जारी सदी में हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर विकास और राष्ट्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होंगे.
भारत विभिन्न प्रकार के मिसाइल सिस्टम, एलसीए- हेलीकाप्टर, मल्टी-पर्पस लाइट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, युद्धपोत और गश्ती पोत, आर्टिलरी गन सिस्टम, टैंक, रडार, सैन्य वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और अन्य हथियार प्रणालियों को हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को आपूर्ति करने के लिए तैयार है.

