सरकार नगर निकायों के हक एवं अधिकार से वंचित करने का साजिश कर रही है: आशा लकड़ा
रांची: मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों के मूल कार्य में हस्तक्षेप कर उन्हें पंगु बनाने का काम कर रही है. 22 अक्टूबर 2020 को जुडको के माध्यम से निकाला गया टेंडर इसका प्रमाण है. जुडको के माध्यम से नगर निकायों में ई-गवर्नेंस व जीआइएस मैपिंग कार्य के लिए एक नई एजेंसी को चयनित करने के लिए टेंडर निकल गया है. जबकि टेंडर में वर्णित अधिकांश कार्य रांची नगर निगम में पूर्व से ही किए जा चुके हैं. हेमंत सरकार नगर निकायों को उनके हक एवं अधिकार से वंचित करने का साजिश कर रही है.
मेयर ने कहा कि राज्य सरकार को झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत निकायों की आवश्यकताएं पूछना चाहिए न कि आम जनता के पैसों का बंदरबांट करने की तैयारी करनी चाहिए. मैं लगातार आम जनता की आवश्यकताओं को लेकर नगर विकास विभाग से फंड की मांग कर रही हूं. राज्य सरकार को रांची नगर निगम की आवश्यकताओं को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आवश्यक्तानुसार फंड आवंटित करने की दिशा में उचित पहल करनी चाहिए न कि आम जनता के पैसों का दुरुपयोग करने की साजिश करनी चाहिए.
मेयर ने यह भी कहा कि रांची नगर निगम में सेल्फ असेसमेंट, होल्डिंग टैक्स, म्युनिसिपल टैक्स, वाटर कनेक्शन, वाटर यूजर चार्ज की प्रक्रिया पूर्व से ही ऑनलाइन है. पूर्व में कार्यरत एजेंसी के माध्यम से इस दिशा में पब्लिक फ्रेंडली कई कार्य किए गए हैं. शहरवासी रांची नगर निगम के माध्यम से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का उपयोग भी कर रहे हैं. आने वाले समय मे इन सेवाओं को और बेहतर करने की तैयारी की जा रही है.
इसके अलावा रांची नगर निगम में नक्शा शाखा, बाजार शाखा व अभियंत्रण शाखा से संबंधित सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध है. रांची नगर निगम को ई-म्युनिसिपल करने की दिशा में भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं. रांची नगर निगम की सेवाओं को पब्लिक फ्रेंडली बनाने की दिशा में काफी पैसे खर्च किए जा चुके हैं. अब पुनः नए सिरे से इन कार्यों के लिए किसी एजेंसी का चयन करना आम जनता के पैसों की बर्बादी है. अन्य निकायों की तुलना में रांची नगर निगम का परफोर्मेंस बेहतर रहा है.
मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि किसी भी प्लान या पॉलिसी को शुरू करने से पहले संबंधित विषय-वस्तु पर स्टेकहोल्डर्स की बैठक कराई जानी चाहिए, ताकि नई योजनाओं की खूबियों और खामियों पर चर्चा की जा सके. सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ या किसी अन्य को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए. निकायों से संबंधित योजनाओं, प्लान या पॉलिसी को लागू कराने के लिए जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेने की आवश्यकता है, ताकि राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट हो. न कि अधिनियम के विरूद्ध जा कर यह टेंडर करना चाहिए.

