सिन्दरी: बुद्धिजीवी जन कल्याण मंच द्वारा ज्ञान ज्योति सावित्रीबाई फुले को विद्या की देवी के रूप में याद किया गया.
बुद्धिजीवी जन कल्याण मंच के सचिव सुरेश प्रसाद ने कहा कि प्रवाह के अनुकूल तिनका भी तैर जाता है, परन्तु प्रवाह के विरुद्ध जो जाते हैं वे पराक्रमी कहलाते हैं. सावित्रीबाई फुले जाति पीड़ित होने के बावजूद महिला कल्याणकारी दर्शन समाज के सामने लाकर पराक्रमी कहलाने का यश प्राप्त की.
प्रोफेसर बीएन राय ने कह कि सावित्रीबाई फुले दलित, आदिवासी, पिछड़ों की ही नहीं, बल्कि सवर्णों के लिए भी रोशनी की किरण थी. उस समय जब रूढ़िवादी व्यवस्था चरम सीमा पर थी, तब सावित्रीबाई फुले शिक्षा की ज्योति जला कर महिला सशक्तिकरण का संदेश दी थी. ऐसे में उन्हेंस विद्या की देवी कहने में को अतिशयोक्ति नही होनी चाहिए.
शिवपूजन राम ने कहा कि जिस देवी ने शिक्षा की ज्योति जलाने में अपार कष्ट का सामना किया, उन्हें शत शत नमन करता हूं.
सावित्रीबाई फूले को हर्दिश, कमलेश सिंह, मदन प्रसाद, प्रो नरेश कुमार सिंह, विनोद राम, राम जतन राम,वीरेन्द्र राम, भरत प्रसाद, गोपाल रजक, जगदीश हांसदा, अनिल हांसदा, रंजन कुमार, रमनी मोहन सहित अन्य साथियों ने पुष्प अर्पित किये. नरेश राम ने धन्यवाद किया.

