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झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा, कहा स्वतंत्रता सेनानी की तर्ज पर सुविधा मिले आंदोलनकारी को

by bnnbharat.com
February 24, 2021
in समाचार
झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा, कहा स्वतंत्रता सेनानी की तर्ज पर सुविधा मिले आंदोलनकारी को
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दुमका. झारखंड आन्दोलनकारी मोर्चा के केंद्रीय संयोजक प्रवीण प्रभाकर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मांग की है कि झारखंड आंदोलनकारी आयोग का गठन शीघ्र किया जाए और आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानी की तर्ज पर सुविधाएं दी जाएं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड आंदोलन में शहीदों के आश्रितों को सीधी नौकरी देने की घोषणा की है, जो स्वागतयोग्य है.

श्री प्रभाकर ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि जिनके संघर्ष के दम पर अलग राज्य बना, वही आंदोलनकारी बीस वर्ष से सम्मान एवं पेंशन की आस में भटक रहे हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. श्री प्रभाकर ने कहा कि झारखंड आंदोलन में भाग लेने वाले 64,000 लोगों ने झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितिकरण आयोग को आवेदन दिया था, जिसमें से अब तक मात्र चार हजार ही चिन्हित किए जा सके हैं और डेढ़ हजार को ही पेंशन शुरू हो पाया है. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को तीस हजार रुपये प्रति माह पेंशन दिया जाए.

श्री प्रभाकर ने कहा कि मोर्चा द्वारा सभी जिलों में सम्मेलन कर आंदोलनकारियों को एकजुट तथा जागरूक किया जा रहा है. अब तक लातेहार, रांची, खूंटी, बोकारो, हजारीबाग, सिल्ली, रातू, गुमला आदि स्थानों पर सम्मेलन हो चुका है. शीघ्र ही संथालपरगना के सभी जिलों में कार्यक्रम होगा.

श्री प्रभाकर ने कहा कि आयोग के भंग रहने के कारण आंदोलनकारियों के चिन्हितिकरण का कार्य ठप हो गया है. उन्होंने कहा कि कई लोग चाहते हैं कि राज्य सरकार उन्हें पेंशन दे या न दे, पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर दे.

श्री प्रभाकर ने झारखंड आंदोलन में शहीद हुए निर्मल महतो, सुनील महतो, सुदर्शन भगत आदि को राजकीय शहीद का दर्जा देने की मांग की और झारखंड के शहीदों के नाम पर विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों, कालेजों,मुख्य सड़क, चौक और चौराहों का नामकरण हो. सभी आंदोलनकारियों को एक ही कैटेगरी में रखकर बराबरी का दर्जा दिया जाए, 1932 के खतियान या अंतिम सर्वे के आधार पर स्थानीय नीति बनाई जाए, 20 सूत्री और निगरानी समिति में आंदोलनकारियों को स्थान दिया जाए, पाठ्यक्रम में आंदोलनकारी और शहीदों की संघर्ष गाथा को शामिल किया जाए, सभी वरिष्ठ आंदोलनकारियों को जिले के कार्यक्रम में अतिथि के रुप में आमंत्रित किया जाए और टोल टैक्स पर भी आंदोलनकारियों को छूट मिले.

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