रांची: झारखंड विधानसभा में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में कहा कि नयी सरकार शहीदों के त्याग और बलिदान को ह्रदय से आत्मसात करते हुए द्वेष, घृणा, अहंकार और प्रतिशोध से दूर रहने का प्रण लेकर कार्य करेगी.
उन्होंने कहा कि झारखंडी अस्मिता को केंद्र में रखकर सजग, तत्पर, स्वच्छ, पारदर्शी और संवेदनशील प्रशासन के माध्यम से राज्य को प्रगति के उच्च शिखर पर ले जाने के लिए संकल्पित है.
राज्यपाल ने कहा कि परिवर्त्तन के साथ निरंतरता लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल स्वभाव है. लोकतंत्र में जन प्रतिनिधि, जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति के प्रतीक होते हैं. पंचम विधानसभा के शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति के बाद राज्य में एक स्थिर सरकार का गठन हुआ है. यह सरकार झारखंड की मूल चेतना के साथ समावेशी विकास का ध्येय लेकर आगे बढ़ेगी. बिना किसी द्वेष के वंचितों को विशेष महत्व देने के मानवीय सोच के साथ सबको अधिकार, सबको सुरक्षा और हर द्वार तक समृद्धि पहुंचाने को प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार, किसानों को हर संभव सहायता, महिलाओं का सशक्तीकरण, दलितों और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों एवं सुरक्षा कवचों की रक्षा, भूमिहीनों को भूमि, खेतिहर मजदूरों को सहायता तथा दुर्भावना आधारित कानूनी उलझनों से दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों एवं गरीबों को मुक्ति देने सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होगा.
राज्यपाल ने कहा कि किसान और खेतिहर मजदूर अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, सरकार इनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने के लिए संल्पित है. किसानों को उनके मुख्य फसल के साथ सब्जियों के उत्पादन के लिए उनके लागत को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराएगी, किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी और उन्हें प्रखंड स्तर पर ही प्रशिक्षण दिया जाएगा.
द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को और मजबूत करते हुए आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए बनाये गये सीएनटी-एपीटी कानून को सख्ती से बहाल रखा जाएगा, साथ ही भारतीय वन कानून और वनाधिकार कानून के आदिवासी हितोन्मुखी स्वरूप को अक्षुण्ण बनाये रखेगी.
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन झारखंड की मूल पहचान है, जंगलों में रहने वाले आदिवासी और मूलवासी भाई-बहनों को संपूर्ण अधिकार दिया जाएगा. सरकार के द्वारा जल के व्यापक संकट को दूर करने के लिए पुराने जलाशयों का पुनर्निर्माण और पुनरूद्धार कर उनकी सफाई और संरक्षण करते हुए उन्हें अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त रखा जाएगा.
राज्य हित में जल, जंगल, जमीन के संरक्षण, संवर्धान और विकास को केंद्र में रखते हुए पूर्व के कुछ बांध और अन्य सिंचाई परियोजनाओं की पुनर्समीक्षा की जाएगी. वन उत्पादों और उस पर आधारित लघु तथा कुटीर उद्योगों को विशेष महत्व दिया जाएगा. वंचित और विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर सरकार नीति बनाएगी.
राज्यपाल ने कहा कि सरकार के लिए शिक्षा की धुरी गुणवत्ता होगी, सरकारी स्कूलों को सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ निजी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से बेहतर बनाते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करायी जाएगी. स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा.

