रांची: दावा सभी गरीबों को बेहतर व्यवस्था प्रदान करने की है, लेकिन असलियत में सिर्फ खोखलापन दिखता है. लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े होते रहे हैं.
हम बात कर रहे हैं झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स की. Bnn bharat की टीम जब रांची के रिम्स पहुंची तो पाया कि अपने मरीजों का इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे लोग पंजीकरण के लिए काउंटर पर खड़े हैं. लेकिन पंजीकरण काउंटर की खिड़की बंद है. फिर हमने जानने की कोशिश की किस तरह की बीमारी से जूझ रहे लोग रिम्स के प्रांगण में पहुंचे हैं, और काउंटर खुलने का इंतजार कब से कर रहे हैं.
पूछताछ के दौरान लोगों ने बताया कि कई लोग पंजीकरण काउंटर पर लगभग एक, डेढ़ घंटे से खड़े हैं, और कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. काउंटर पर खड़े लोगों का कहना था की वे जब से आए हैं तब से यह काउंटर बंद है. हालांकि अस्पताल के नियमानुसार सुबह 8:30 बजे से 12:30 बजे तक और 2:30 बजे से 4:30 बजे तक पंजीकरण काउंटर खुलता है.
लोगों का कहना था की पंजीकरण काउंटर की समय सीमा होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कई बार काउंटर लेट से खुलते हैं. गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को घंटों पंजीकरण कराने के लिए इंतजार करना पड़ता है.
सवाल यह है की जिन आम इंसान की व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, जब वही अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. आलम यह है की लोग इस व्यवस्था को झेलने के लिए मजबूर है क्योंकि उन्हें इस अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है. कई लोगों की मजबूरी आर्थिक रूप से कमजोर होना भी है. लेकिन लोगों की परेशानी से अस्पताल प्रशासन के कानों में जूं तक नही रेंगती. वहीं ऐसा प्रतीत होता है कि इस लचर व्यवस्था को लेकर सरकार भी आंखे मूंद चुकी है.

