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अधिकारियों को गुमराह कर रची थी सरकारी खजाने पर डाके की योजना, कार्यपालक पदाधिकारी ने किया विफल

by bnnbharat.com
October 18, 2019
in Uncategorized
अधिकारियों को गुमराह कर रची थी सरकारी खजाने पर डाके की योजना, कार्यपालक पदाधिकारी ने किया विफल

The plan to rob the government treasury was misguided by the officials, the executive officer failed

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सूर्यकांत कमल,

चतरा: जिले में एंटी करप्शन स्पेशलिस्ट के रूप में प्रसिद्ध हो चुके कार्यपालक दंडाधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने जाते-जाते एक बार फिर शहरवासियों का दिल जीत लिया. अपनी सकारात्मक कार्यशैली व भ्रष्टाचार विरोधी कार्यों के बल पर न सिर्फ वे आमलोगों की उम्मीदों पर खरा उतरे बल्कि भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर जिले में एक मिशाल कायम कर गए हैं. उन्होंने चतरा में तैनाती के आखिरी दिन नगर परिषद में व्याप्त वित्तीय अनियमितता को ले बड़ी कार्रवाई की घोषणा कर भ्रष्टाचारियों में हड़कंप मचा दिया है. उन्होंने वित्तीय अनियमितता के आरोप में लम्बे समय से नियमविरुद्ध एक ही पद पर बने रहने वाले नगर परिषद के प्रधान सहायक सह नाजिर मो.शमसुल हक को न सिर्फ निलंबित करवाया बल्कि उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा भी कर दी. प्रधान सहायक सह नाजिर को कार्यपालक पदाधिकारी की अनुशंसा पर उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह ने निलंबित कर दिया. साथ ही प्रपत्र गठित कर विभागीय कार्रवाई हेतू नगर विकास विभाग भी भेज दिया. निलंबन अवधि में मो.शमसुल हक का मुख्यालय नगर परिषद कार्यालय ही रहेगा.

अधिकारियों को अंधेरे में रख करता था गड़बड़ी

प्रधान सहायक के निलंबन की जानकारी मीडिया को देते हुए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि वह अधिकारियों को अंधेरे में रख गुमराह करते हुए सरकारी खातों में हेराफेरी करता था. उन्होंने बताया कि शमसुल हक मजदूरी भुगतान के फाइलों में अधिकारियों से कुछ ऑर्डर करवाता था और भुगतान कम देता था. जिससे न सिर्फ मजदूरों के जीवन यापन पर प्रतिकूल असर पड़ता था बल्कि विकास कार्यों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता था. स्पेशल पदाधिकारी ने यह भी बताया कि प्रधान सहायक सह नाजिर के द्वारा बगैर विभागीय आदेश के मजदूरों को मिलने वाले ईपीएफ फंड की राशि को यूनियन बैंक में एक खाता (645602010010560) खुलवाकर रखा गया है, जिसका खामियाजा दिन रात मेहनत करने वाले मेहनतकश मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि मजदूरों को मिलने वाली राशि को उनके खातों में न भेजकर फर्जी खाता खुलवाकर उसमे ईपीएफ की राशि को संग्रहित रखना वित्तीय अनियमितता है. नाजिर ने गरीबों के हक का करीब 15 लाख रुपया इस खाते में जमा कर रखा है. जिसका विभाग में कोई लेखा-जोखा नहीं है. ऐसे में उक्त खाते में मजदूरों के हक की जमा राशि के इंटरेस्ट का लाभ कौन ले रहा है यह भी जांच का विषय है.

स्वीकृत राशि से ज्यादा भुगतान की योजना ने खोला पोल

कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि शहर के समाहरणालय इलाके में संचालित न्यू विश्वकर्मा गैरेज के संचालक प्रमोद मिस्त्री से पूर्व में टेंडर के आधार पर पानी टैंकर क्रय किया गया था. इसके लिए पूर्व स्पेशल पदाधिकारी गंगा महतो ने उसे एक लाख 43 हजार रुपये भुगतान करने का ऑर्डर फाइल में दिया था. लेकिन उनके तबादले के बाद नगर परिषद का प्रभार ग्रहण करने वाले राजेश कुमार सिंह को नाजिर ने गुमराह करने की साजिश रची. इसी योजना के तहत एक लाख 43 हजार रुपये की स्वीकृत राशि को बढ़ाकर उसने चुपके से साढ़े आठ लाख कर दिया और ठेकेदार को भुगतान करने को ले कार्यपालक पदाधिकारी के पास मंजूरी के लिए फाइल बढ़ा दिया. लेकिन यहां उसकी यह योजना धरी की धरी रह गई. राजेश कुमार सिन्हा ने उसकी गड़बड़ी पकड़ ली और उसपर कार्रवाई करने की अनुशंसा डीसी से कर दी, जिसके आधार पर डीसी ने शमसुल हक को सस्पेंड कर दिया.

कैशबुक व पासबुक नहीं कर रहा मैच, बड़ी गड़बडी की आशंका

कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि नगर परिषद कार्यालय का जिले के विभिन्न बैंकों में कुल 24 खाते संचालित होते हैं. इन सभी बैंक खातों में लेनदेन की सम्पूर्ण जानकारी नाजिर सह प्रधान सहायक शमसुल के पास होती है. लेकिन मजे की बात तो यह है कि विगत दिनों हुए पड़ताल में खातों के कैशबुक व पासबुक में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है. न तो खाते से कैशबुक मैच कर रहा है और न ही पासबुक. इतना ही नहीं चार महत्वपूर्ण खातों का कैशबुक भी नदारद है.

लघु सिंचाई विभाग को भेज दी थी गणना कर्मियों की फर्जी सूची

राजेश कुमार सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि नगर परिषद कार्यालय में प्रधान सहायक सह नाजिर शमसुल हक की मनमानी इस कदर चलती थी कि वह अधिकारियों व कर्मियों को भी तरजीह तक नहीं देता था. कार्यालय में उसके लालफीताशाही रवैये का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में स्थित तालाबों और जलाशयों की गणना को लेकर लघु सिंचाई विभाग ने नगर परिषद कार्यालय से गणना कर्मियों की सूची मांगी थी. जिसके बाद प्रधान सहायक ने कार्यपालक पदाधिकारी को सूचित किए बगैर अपना व अपने करीबियों के नाम की सूची बनाकर उसने अपने हस्ताक्षर से लघु सिंचाई विभाग को भेज दिया था. इस सूची में उसने अपने नाम के अलावे लेखापाल शिव कुमार सिंह, चालक मोहम्मद नौशाद, सुरेंद्र कुमार, जमादार मोहम्मद रसूल व कर संग्रह विलेश कुमार का नाम शामिल किया था. जिसका खुलासा भी हो चुका है.

शोकॉज का नहीं दिया था संतोषजनक जवाब

विभागीय कार्यों में लापरवाही व वित्तीय अनियमितता कर सरकारी खजाने में हेराफेरी करने वाले प्रधान सहायक सह नाजिर मोहम्मद शमसुल हक की कारगुजारी उजागर होने के बाद कार्यपालक पदाधिकारी ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया था. नोटिस के माध्यम से उससे जवाब की मांग की गई थी. लेकिन उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था. जिसके बाद निलंबन की अनुशंसा कार्यपालक पदाधिकारी ने उपायुक्त से की थी.

लोगों में हर्ष, कहा नगर परिषद कार्यालय का हुआ पुनर्जन्म

प्रधान सहायक के निलंबन की खबर से ना सिर्फ नगर परिषद कार्यालय कर्मियों में हर्ष है बल्कि विकास कार्यों को धरातल पर उतारने वाले संवेदको ने भी खुशी जाहिर की है. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक संवेदक ने बताया कि मामले की अगर निष्पक्षता से जांच हो तो जिले में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला उजागर हो जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रधान सहायक विकास कार्यों की फाइलों को सालों-सालों तक पैसे की लालच में दबा कर रखता था. इतना ही नहीं विकास योजनाएं क्रियान्वित हो जाने के बाद भी अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद वह भुगतान में इस उद्देश्य से आनाकानी करता था कि उसे लाभ मिल सके. संवेदक ने इस कार्रवाई के लिए उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह और सूत्रधार कार्यपालक पदाधिकारी राजेश कुमार सिन्हा को बधाई दी है और कहा है कि नाजिर के निलंबन से नगर परिषद कार्यालय का पुनर्जन्म हुआ है. एक बार फिर विकास के क्षेत्र में नगर परिषद कार्यालय नया आयाम गढ़ेगा.

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