सीतामढ़ी: जिले के बथनहा प्रखंड में जमीन हड़पने के चक्कर में जिस तरह जलस्रोतों का अस्तित्व मिटाया जा रहा. इससे साफ जाहिर होता है कि पानी से ज्यादा महत्वपूर्ण घर और मकान है.
तीन दशक में प्रखंड के अधिकतर तालाब जैसे महत्वपूर्ण जलस्रोत अतिक्रमण के शिकार हो चुके हैं. जो तालाब कभी आग बुझाने के काम में आ रहे थे वही आज अतिक्रमण की आग में जल रहे हैं.
इस तरफ न तो ग्रामीणों का ध्यान है न ही जनप्रतिनिधि या पदाधिकारियों का. स्वार्थ के वशीभूत होकर ग्रामीण पूर्वजों की धरोहर तालाब व ताल की जमीन को भरकर मकान बना रहे हैं. तालाब की जमीन को हड़पने की होड़ मची हुई है.
ऐसे में जलस्रोतों को बचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है. अतिक्रमण के कारण विलुप्त हो रहे जलस्रोतों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट काफी गंभीर है. इसके बावजूद प्रशासनिक शिथिलता के कारण यह समस्या गंभीर बनी हुई है.
स्थानीय ग्रामीण महेश दास ने बताया कि बथनाहा प्रखंड के मझौलिया गांव में दो-दो तालाब है. एक तालाब का रकबा नौ एकड़ तो दूसरे का करीब आठ एकड़ होगा. एक तालाब गांव के उत्तरी छोर पर बिल्कुल सटा हुआ है तो दूसरा गांव के दक्षिणी छोर पर है.
तीन दशक पूर्व इन तालाबों की सुंदरता लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी. तालाब की पिड पर बैठकर लोग काफी सुकून महसूस करते थे.
गांव में जब भी भीषण अग्नि प्रकोप हुआ उस वक्त इन्हीं तालाब के बदौलत ग्रामीणों ने आग की विभीषिका पर काबू पाया. तालाब के पानी से ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी होती थी.
समाजसेवी सुजय मंडल ने बताया कि गांव के अलावा अगल-बगल के गांव के मवेशी आकर मझौलिया गांव में पानी पीते थे. आज स्थिति काफी बदल चुकी है. पुराने दिनों को लोग भूल चुके हैं.
ग्रामीणों में तालाब की जमीन पर कब्जा जमाने की होड़ मची हुई है. जिसके कारण दोनों तालाब आधा से अधिक भर चुका है. गांव के समीप वाले तालाब में कई घरों के नाली का पानी गिरता है. इससे तालाब का पानी दूषित हो चुका है.
इस पानी से लोग हाथ पैर भी धोना मुनासिब नहीं समझते. जिन पूर्वजों ने शौक से गांव में दो-दो तालाब का निर्माण कराया होगा शायद ही उन्होंने सोचा होगा कि आने वाली पीढ़ी तालाब का अस्तित्व मिटा देगी.
जिस तेजी से तालाब की जमीन पर अतिक्रमण जारी है ऐसे में साल दो साल के अंदर शायद ही गांव में तालाब नजर आए. बुजुर्ग दीपनारायण मंडल व अन्य ग्रामीणों का कहना है की शायद ही जिला के किसी गांव में दो दो तालाब होगा. तालाब गांव की समृद्धि की पहचान थे. तीन दशक पूर्व गांव का तालाब सुंदर व स्वच्छ था.
ग्रामीण छठ पूजा में तालाब पर एकत्रित होते थे. आज गंदगी के कारण तालाब का पानी दूषित हो चुका है. लेकिन आज मझौलिया बाजार से पानी निकासी करने में कठिनाई है. पोखरा के जमीन कब्जा किए लोगों के द्वारा ग्रामिण कार्य के द्वारा मझौलिया लत्तीपुर सड़क पर बने पुल को बंद कर दिया गया है.
क्या कहते हैं कनीय अभियंता-
कनीय अभियंता ललित मोहन ने स्थानीय सरकारी जमीन को कब्जा किए लोग को मौके पर पहुंच कर पुलिया को साफ कराकर पानी निकासी का रास्ता देने का निर्देश दिया .
क्या कहते हैं मछुआ विभाग के सचिव-
मछुआ विभाग के सचिव गगनदेव सहनी ने पोखरा की जमीन पर अवैध कब्जा किए लोगों को जल्दी से जमीन खाली करने के लिए कहा नहीं तो उच्चाधिकारी को आवेदन देकर अनुशासनात्मक कार्रवाई का निवेदन किया जाएगा.

