रांची: रांची प्रेस क्लब की पहली निर्वाचित मैनेजिंग कमिटी ने दो वर्षों का कार्यकाल पूरा कर लिया है. प्रेस क्लब के निर्वाचित पदाधिकारियों ने बताया कि पहली कमिटी के सामने अनेकानेक चुनौतियां थीं. संस्था की कार्यप्रणाली तय करने से लेकर सदस्यों के हित में निर्णय लेना और उनपर अमल करना आसान नहीं था. सबसे बड़ी चुनौती थी क्लब के सुचारू रूप से संचालन के लिए एक सुनिश्चित आर्थिक मॉडल तैयार करना.
क्लब ने इन दो वर्षों में अपना एक आर्थिक मॉडल विकसित कर लिया है. जब इस कमिटी ने कार्यभार संभाला था, तब रेवेन्यू के स्रोत नगण्य थे. आज क्लब को प्रतिमाह लगभग तीन लाख रुपये से ज्यादा रेवेन्यू हासिल हो रहा है. आप पायेंगे कि क्लब में आधारभूत संरचना के विकास के काम लगातार हुए हैं. इसके बाद भी आज क्लब के पास लगभग 14 लाख रुपये का फंड है. पिछली वार्षिक आमसभा में हमारी कमिटी ने एक वर्ष के कार्यकाल पर रिपोर्ट पेश की थी. इस वर्ष की आमसभा के पूर्व हम दोनों वर्षों के कामकाज पर यह रिपोर्ट आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं.
रांची प्रेस क्लब की पहली निर्वाचित कमेटी को एक शानदार बिल्डिंग तो मिली, लेकिन कान्फ्रेंस हॉल को छोड़कर इसका कोई भी हिस्सा फर्निश्ड नहीं था. कांफ्रेंस हॉल के अलावा इस शानदार भवन में सदस्यों के बैठने के लिए एक अदद कुर्सी तक मौजूद नहीं थी. कमेटी के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित सीसीएल के चेयरमैन ने इसकी फर्निशिंग कराने की घोषणा की थी, लेकिन हमें दुख है कि एक दर्जन से अधिक वार्ताओं और दर्जनाधिक पत्राचार के बावजूद सीसीएल ने अपना यह वादा पूरा नहीं किया. सीसीएल प्रबंधन ने कभी वार्षिक बजट में प्रस्ताव लाने, कभी बोर्ड मीटिंग में प्राक्कलन पेश करने, तो कभी किसी और तकनीकी कारण का हवाला देकर लगभग आठ महीने तक इस मामले को खींचे रखा.
सीसीएल की ओर से क्लब को जो अंतिम प्रस्ताव दिया गया, उसमें कहा गया कि फर्निशिंग कराने के बदले क्लब भवन का पूरा एक फ्लोर दस वर्ष के लिए सीसीएल को सौंप देना होगा. जाहिर तौर पर यह क्लब के आम पत्रकार सदस्यों के हितों पर कुठाराघात होता, इसलिए मैनेजिंग कमेटी ने इस सौदेबाजी को पूरी तरह नकार दिया.

