पटना: व्यक्ति के एक बेहतर चरित्र और व्यक्तित्व की नीव एक विद्यालय से जुड़ी होती है जहां विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को एक बेहतरीन वातावरण में शिक्षित और प्रशिक्षित किया जाता है पर बिहार की राजधानी पटना मैं मौजूद चिरैयाटांड़ रोड स्थित गजाधर मध्य विद्यालय, पृथ्वीपुर चिरैयाँटांड़ की स्थिति तो कुछ और ही है. इस विद्यालय में फीडर कन्या विद्यालय की कक्षाओं का भी संचालन होता है.
इस विद्यालय की स्थिति कितनी दयनीय हो चुकी है इसका अंदाजा वहां के कुछ दृश्यों के जरिए लगाया जा सकता है. बदहाल विद्यालय की स्थिति को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां कभी भी कोई भयंकर हादसा हो सकता है. माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश में स्वच्छता का संदेश दिया लेकिन इस विद्यालय के आसपास के दृश्य स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहे हैं जिसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि विद्यालय के ठीक बाहर ही कूड़े कचरे बिखरे पड़े हैं जो कहीं ना कहीं विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का सबब है.
कोरोना काल के दौरान किसी भी प्रकार की गंदगी का आसपास के वातावरण में मौजूद होना निश्चित तौर पर किसी भी व्यक्ति के सेहत के साथ खिलवाड़ करना ही है.
वह विद्यालय जिसे हम पुरातन काल से शिक्षा का मंदिर कहते आ रहे हैं आज उसी विद्यालय को विद्यालय कोइतनी बदहाली में देखना निश्चित तौर पर किसी भी व्यक्ति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
एक जागरूक नागरिक होने के नाते यह प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है कि वह अपने आसपास मौजूद शिक्षा के मंदिर को स्वच्छ और मजबूत बनाए रखें ताकि आने वाले समय में भारत का भविष्य उज्जवल होने के साथ ही सुरक्षित भी रहे.
विद्यालय की जो स्थिति वर्तमान समय में बनी हुई है वह निश्चित तौर पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए उचित नहीं है. यदि विद्यालय चलाना ही है तो इस विद्यालय का जीर्णोद्धार करते हुए इसे पुनः सुचारू रूप से दुरुस्त करना चाहिए और यदि यह संभव ना हो तो इस विद्यालय का स्थानांतरण कर देना चाहिए अब यह देखने वाली बात होगी कि आने वाले समय में चिरैयाटांड़ रोड स्थित गजाधर मध्य विद्यालय का उधार किस प्रकार किया जाएगा.

