कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में उपस्थित भाजपा विधायकों ने सहमति जतायी थी
रांची:- झारखंड विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को पूर्व निर्धारित समय के अनुसार पूर्वाह्न 11 बजे प्रारंभ हुई. नियत कार्यक्रम के अनुसार अल्पसूचित प्रश्नों से सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई. पूर्व की भांति भारतीय जनता पार्टी के विधायकों द्वारा एक बार फिर कार्यस्थगन को पहले पढ़ने का अनुरोध किया गया. भाजपा की ओर भानु प्रताप शाही ने अध्यक्ष से जोर देकर यह आग्रह किया कि पूर्व की भांति कार्यस्थगन को पहले पढ़ा जाए.
इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने झारखंड विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 303 और 304 का हवाला दिया गया है. नियम 303 में यह स्पष्ट है कि जो सदस्य सदन की जानकारी में कोई ऐसा विषय लाना चाहे, जो औचित्य प्रश्न न हो, तो वह सचिव को लिखित रूप से सूचना देगा, जिसमें संक्षेप में उस विषय को बताएगा, जिसे वह सभा में उठाना चाहता हो और अध्यक्ष द्वारा सहमति दिये जाने के बाद ऐसे समय जो अध्यक्ष निश्चित करें,उसे ऐसा प्रश्न उठाने की अनुमति होगी. नियम 303 के विषय प्रश्नकाल के पश्चात स्ािगन प्रस्तावों की ग्राह्यता के बारे में निर्णय लेने के बाद तथा ध्यानाकर्षण सूचनाओं पर मंत्रियों द्वारा वक्तव्य दिये जाने के पूर्व अध्यक्ष की सहमति से उठाये जा सकेंगे. नियम 303 के अधीन विषयों को उठाने के लिए केवल 15 मिनट ही उपलब्ध रहेंगे और जो सदस्य नियम 303 के अधीनक सदन की जानकारी में कोई विषय लाने के इच्छुक हो, वह उस विषय को उठाने की पूर्व सूचना लिखित रूप से सुबह दस बजे तक विधानसभा सचिवालय में दे सकेंगे, इसमें अधिक से अधिक 50 शब्द रहेंगे. स्पीकर ऐसे विषय पर समुचित सहमति दिये जाने पर संबंधित सदस्य का नाम पुकारे जाने पर ही प्रश्न उठाये जा सकेंगे, अध्यक्ष की अनुमति के बिना कोई विषय नहीं उठाया जा सकेगा. यह भी स्पष्ट है कि ऐसे विषयों को उठाये जाने पर सरकार द्वारा कोई प्रकाश नहीं डाला जाएगा और न उनके संबंध में सदस्यों की ओर कोई जोर ही दिया जाएगा. हालांकि जो सूचना सदन में पढ़ी जाएगी,उसकी एक प्रति यथाशीघ्र सरकार के संबंधित विभाग को भेजी जाएगी और उसका लिखित उत्तर सरकार की ओर से अधिकतम 15 दिनों की अवधि में विधानसभा सचिवालय को प्रेषित किया जाएगा.
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा यह कहा गया कि चूंकि कार्य संचालन नियमावली में यह पूर्व से ही प्रावधानित है कि कार्यस्थगन की सूचनाएं प्रश्नकाल के बाद और ध्यानाकर्षण से पहले ली जाएगी और इस संबंध में नियमन हो चुका है, तो इसे बदला जाना यथोचित नहीं होगा. सदन के बाद स्पीकर के कक्ष में आकर भाजपा विधायकों ने पुनः इस संबंध में अपने विचार रखें, जिस पर स्पीकर ने बताया कि इस संबंध में कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा की गयी थी, जिसमें भाजपा विधायक उपस्थित थे और उनकी सहमति के उपरांत ही यह निर्णय लिया गया, जो निर्धारित नियमावली के अनुकूल भी है.
