रांची: भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण उरांव ने राज्य सरकार के मंत्री रामेश्वर उरांव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार कोरोना संकट से देश को बाहर निकालने के लिये जी जान से लगी है.
केंद्र सरकार मरकज में शामिल जमाती लोगों को भी कोरोना संक्रमण से बचाना चाहती है. ऐसे में साम्प्रदायिकता की रोटी सेंकने वाले लोग उन्हें गुमराह करने में लगे हैं. ऐसे लोगों को उनकी जिंदगी प्यारी नहीं है.
अरुण ने कहा कि आज मोदी की दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि भारत दुनिया के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित है. विश्व आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की प्रशंसा कर रहा.
उरांव ने कहा कि रामेश्वर उरांव अपने बयानों से अपनी विफलता छिपाना चाहते हैं. पूरे प्रदेश में गरीबों तक राशन नहीं पहुंच रहा, लोग राशन के अभाव में भूखे सोने को विवश हैं.
केंद्र सरकार ने गरीबों के लिये जो तीन माह के राशन उपलब्ध कराए हैं वह जरूरत मंदों, गरीबों तक नहीं पहुंच रहे. राज्य के पदाधिकारी राशन वितरण के संबंध में असंवैधानिक निर्णय ले रहे. यह सब सरकार की विफलता को दर्शाता है.
अरूण ने कहा कि हेमंत सरकार साम्प्रदायिक तुष्टिकरण में आकंठ डूबी है. अधिकारियों की पोस्टिंग में मजहब देखा जा रहा. अपराधियों पर कार्रवाई में मजहब देखा जा रहा, लॉकडाउन के नियमों के पालन में मजहब देखा जा रहा, मजदूरों को बस से भेजने में मजहब देखा जा रहा, कोरोना संक्रमण के इलाज को मजहब प्रभावित कर रहा.
उन्होंने कहा कि लोहरदगा में सीएए समर्थन रैली पर पथराव की घटना हो, सिसई में आदिवासी की हत्या हो या कोरोना संकट के बीच के निर्णय हों, राज्य सरकार का साम्प्रदायिक चेहरा खुलकर सामने आया है.

