40 महीने बाद 183 मदरसों में कार्यरत 825 शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मियों के बकाया का भुगतान जल्द
रांची: झारखंड में 183 मदरसा शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों के लंबित वेतन भुगतान का रास्ता साफ हो गया है. मदरसा शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मियों के तीन वर्ष चार महीने के बकाया भुगतान के लिए 58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. रांची में शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में वेतन भुगतान में आ रही अड़चन को दूर करने का फैसला लिया गया है.
मदरसा शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर राज्य मंत्रिमंडल ने स्वीकृति प्रदान कर दी थी, लेकिन कुछ बिन्दुओं को लेकर आ रही अड़चन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक त्रिसदसीय समिति को सभी कठिनाईयों को दूर करने की सौंपी थी.
इस समिति में ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, मानव संसाधन विकास मंत्री जगरनाथ महतो और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) विधायक सुदीप्त कुमार सोनू शामिल थे. इस संबंध में मंत्री आलमगीर आलम और जेएमएम विधायक सुदीप्त कुमार सोनू ने शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो के साथ उनके कार्यालय कक्ष में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक की.
बैठक सार्थक रही और मदरसा शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मियों के लंबित वेतन भुगतान को लेकर जल्द ही सारी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने तथा शीघ्र ही जिलों को आवंटन भेज देने का निर्णय लिया गया.
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने मदरसा शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों के लंबित वेतन भुगतान में आ रही बाधा को दूर करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार के समय से ही राज्य के 183 मदरसों के करीब 825 शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों का वेतन भुगतान लंबित था, इस कारण इन मदरसा शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी थी.
वहीं लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण उनकी स्थिति और भी खराब हो गयी थी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस-झामुमो गठबंधन नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अपने वायदे के मुताबिक मदरसा शिक्षकों के वेतन भुगतान में आ रही सभी अड़चनों को दूर कर अपना वायदा पूरा किया है.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18, 18-19, 19-20 और 20-21 के चार महीने के बकाया भुगतान से मदरसा शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सारी परेशानियां दूर हो जाएगी, साथ ही लॉकडाउन के पश्चात पढ़ाई शुरू होने पर मदरसों पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी.

