सपन कुमार आकाश,
सुरसंड (सीतामढ़ी): जनाब, सुरसंड की सड़क समझ कर सरपट भागने की कोशिश जान लेवा हो सकती है, क्योंकि इस नाम से चर्चित इस शहर की सड़कों की हालत वैसी नहीं हैं. कारण गड्ढे़ में सड़क है, या फिर सड़क में गड्ढे़ यह पता भी नहीं चलेगा. इनमें कुछ तो डेंजर जोन के रूप में मुंह बाए खड़ी है. शहर की हालत ऐसी है कि सड़कों पर कभी सीवरेज का पानी जमा रहता है, तो कभी बारिश का. ऐसे में इन गड्ढों वाली सड़कों की हालत ऐसी बन चुकी है कि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी.
हास्यास्पद तो यह है कि यह जिला प्रशासन को दिखाई दे रहा है और न ही नगर पंचायत को. लाखों खर्च कर बनाई इन सड़कों की दशा और दुर्दशा को देखने वाला कोई नहीं है. दिन के समय में तो फिर भी गनीमत है, पर रात का सफर तो बिल्कुल जानलेवा है. हैरत तो इस बात की है कि सुरसंड की सड़कों की हालत भी ऐसी है. गली कूचे की तो भगवान ही मालिक हैं.
मुख्य सड़कों पर भी गड्ढ़े हैं, जिन्हें भरना जरूरी है. शहर की मुख्य सड़कों पर भी गड्ढ़े हैं. इन पर अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो, यह बड़े होते जाएंगें. सड़क पर बने गड्ढे ही हादसों को जन्म देते हैं.
प्रशासन को गड्ढ़ों को तुरंत भरवाना चाहिए . बेशक सरकार विकास करने के दावे कर रही है. लेकिन सड़कों की हालत इस प्रकार की है कि विकास का कोई भी पैसा सड़कों पर खर्च किया गया नजर नहीं आता. सड़कों की हालत इतनी बुरी है कि लोग अक्सर हादसों का शिकार होते हैं. गड्ढ़ों को तुरंत भरे जाने चाहिए ताकि हादसा ना हो.

