बसंतराय: झारखंड प्रदेश के गोड्डा जिला अंतर्गत बसंतराय प्रखंड के कैथपुरा पंचायत अंतर्गत कैथपुरा गांव से एक बेहद ही दिल को झकझोर देने वाली दृश्य सामने आई है. मालूम हो कि कैथपुरा गांव के अंदर तीन ऐसे बच्चे वास कर रहे हैं जिनका अब
इस दुनिया में कोई नहीं है,बच्चे जिसे भविष्य निर्माता कहा जाता है. आज इस बच्चे के सामने खुद का भविष्य अंधकारमय है. उक्त तीनों बच्चे क्रमशः जैनब (उम्र:-15 वर्ष),खुसमुदा (उम्र:-13 वर्ष) और मोहम्मद सागिर (उम्र:-11 वर्ष) तीनों पिता:- मोहम्मद नजाम के पुत्र और पुत्री है. आज से तकरीबन 5 वर्ष पूर्व ही इस बच्चे के ऊपर से माँ के आंचल का साया उठ गया तो वहीं कुछ दिनों पिता भी स्वर्गवासी हो चुके हैं, यूं कहें तो ये बच्चे अपने माता पिता दोनों को खो चुके हैं,बताया जा रहा है. इस बच्चे के माता-पिता बीमारी की बलिवेदी पर चढ़ कर स्वर्ग सिधार गए और इस कमजोर कंधे पर ये बच्चे न जाने कितना बोझ लेकर जिंदगी के कठिन डगर पर चलने को विवस हैं, कठिनाइयों के बोझ तले दबे इस बच्चे के लिए कोई सरकारी महकमा आजतक मसीहा बनकर नहीं उभरे.
यहां एक कहावत बिल्कुल ही चरितार्थ हो रहा है कि “मरता क्या नहीं करता” ये बच्चे खुद दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा कर अपने जीवन पथ पर लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ रहे हैं. वहीं विधि का विधान कहें या जनप्रतिनिधि का दोहरी रवैया,जिस गॉंव की ये बच्चे आज इतनी कठिन डगर को पार कर अपने-आप को समाज के सामने स्वावलम्बी बनाने की जद्दोजहद कर रहा है. उसी गॉंव में इस पंचायत के प्रतिनिधित्वकर्ता यानी पंचायत के मुखिया भोठी पासवान रहते हैं लेकिन इस बच्चे के लिए आज तक एक आवास तक उपलब्ध नहीं करा पाए हैं. यूं कहें तो सरकार के हर दिन के दावे को पूरी तरह से झूठी साबित करने में यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है.
नतीजन आज इस तीनों भाई-बहनों के सामने उजाले की उम्मीद तक नहीं दिखती है,झुग्गी-झोपड़ियों में ही अपने उम्मीद को संजोए हुए अपनी हर एक दिन की कठिनाइयों को बगैर किसी के आगे आंसू बहाए झेलने को विवस हैं. वहीं इस परिवार के लिए यदि कोई मसीहा बने हैं तो वो है टीम 5 नामक एक संस्था जो इस बच्चे को बीच-बीच में मदद कर रहे हैं. वहीं जब टीम 5 के एक सदस्य मोहम्मद तौसीफ से हमारे संवाददाता की बात हुई तो उन्होंने बताया कि विगत कुछ दिन पूर्व इस परिवार के सबसे छोटे सदस्य मोहम्मद सागिर का बिजली के करंट से हाथ झुलस गया है, जिसकी सूचना मिलने के बाद टीम 5 के द्वारा बसंतराय मुख्यालय स्थित शिफा नर्सिंग होम में आकर उपचार कराया गया लेकिन वहां के डॉक्टरों ने समुचित इलाज के लिए झुलसे हुए चमड़े को हटाने की बात कही है.
मौजूदा हालात दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज होने पर आकर टिका है और सामने बच्चे का समुचित इलाज की चिंता है जिसका भरपाई करने के लिए कोई आगे आना नहीं चाहता है. ऐसे में टीम 5 ने गोड्डा जिला जिला उपायुक्त एवं सभी जनप्रतिनिधि से गुहार लगाते हुए इस बच्चे के भविष्य को लेकर सर्वप्रथम इलाज की मांग कराते हुए समुचित इलाज कराने की बात कही है और एक आवास मुहैया कराने की गुहार लगाई है।ऐसे में अब देखना ये होगा कि क्या इस उजड़े परिवार के लिए कोई छांव बनकर सामने आएगी या फिर सिर्फ ये चीजें अखबार के पन्नों तक सिमट कर रह जाएगी.

