जमशेदपुर : झारखंड में शिक्षा भगवान भरोसे है. पूर्व की सरकार ने जिस तरह से स्कूलों को मर्ज किया उससे शिक्षा का स्तर तो गिरा ही, साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों का मनोबल भी टूट गया.
इसको लेकर राजनीति भी खूब हुई, लेकिन ना सरकार ने अपना फैसला बदला ना ही स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी. वहीं 1963 से जमशेदपुर के परसुडीह में संचालित हो रहे एक मध्य विद्यालय को 57 साल से स्कूल में बिजली और पानी के साथ मान्यता का आज भी इंतजार है.
1963 से मुख्य सड़क किनारे बने स्कूल के बच्चे आज भी पानी के लिए तरस रहे है. स्कूल में जर्जर भवन से स्कूल का बिल्डिंग तो बन गया नया लेकिन पानी बिजली स्कूल के बाउंड्री वॉल के बाहर सड़क तक ही सीमित रह गई.
वैसे धीरे धीरे अब स्कूल से बच्चे भी पलायन करने को विवश हैं. वहीं स्कूल को आज एक मात्र शिक्षक चला रहे हैं. उनका कहना है कि पूर्व में चार शिक्षक हुआ करते थे, लेकिन स्कूल की उदासीनता के कारण आज सभी स्कूल छोड़ चुके हैं.
पूर्व में डेढ़ सौ से अधिक बच्चे यहां मुफ्त शिक्षा ग्रहण करते थे. मगर आज छात्रों की संख्या 73 रह गई है. उन्होंने बताया कि ये सभी छात्रों के अभिभावक डेली मजदूरी कर कमाने खाने वाले गरीब तत्व के लोग हैं.

