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यह दुनिया ‘दिल’ से नहीं ‘दिमाग’ से चलती है!

by bnnbharat.com
May 14, 2020
in समाचार
यह दुनिया ‘दिल’ से नहीं ‘दिमाग’ से चलती है!

यह दुनिया 'दिल' से नहीं 'दिमाग' से चलती है!

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नीता शेखर,

“यह दुनिया दिल से नहीं दिमाग से चलती है!” हर कदम पर धोखा है. धोखे में दुनिया रहती है!”

शांति के साथ भी धोखा हुआ था, धोखा किसने दिया उसके बचपन की सहेली स्वाति ने, जिसे उसने जान से भी ज्यादा दोस्ती की थी. दोनों पक्की सहेलियां स्कूल से लेकर कॉलेज तक एक कक्षा में पढ़ना एक ही साथ रहना जब भी देखो दोनों हमेशा साथ ही रहती.

लोगों ने उनका नाम ही रख दिया था “हीरा मोती की जोड़ी” उन्हें उनके नाम से कम हीरा मोती की जोड़ी नाम से ज्यादा जानते थे. और उनको एक ही कॉलेज में नौकरी मिल गई. अब तो और भी मजबूत हो गया. दोनों सहेलियां काफी खुश रहती थी. इसी बीच शांति की शादी ठीक हो गई. उसने बहुत ही खुशी खुशी अपने सहेली स्वाति को बताया. स्वाति भी यह सुनकर काफी खुश हुई. देखते देखते शांति की सगाई मोहन से हो गई. मोहन भी काफी हैंडसम और दरियादिल था.

एक ही बात से लोगों को अपने वश में कर लेता था. सगाई के बाद शांति और मोहन मिलने जुलने लगे थे. साथ में शांति की सहेली स्वाति भी जाया करती थी. अब तीनों की अच्छी तिकड़ी बन गई थी. कहीं भी जाना होता तीनों साथ जाया करते थे. इसी बीच स्वाति ने किसी दूसरे शहर में नौकरी का फॉर्म भर दिया.

तुमने ऐसा क्यों किया. वह एक ही जवाब देती तू कॉलेज में नहीं रहेगी तो मेरा मन नहीं लगेगा. फिर यहां तेरी याद आएगी इसलिए सोचती हूं बाहर कहीं नौकरी कर लो. फिर बात आई गई हो गई. नौकरी कानपुर के किसी कॉलेज में हो गई. बचपन से आज तक साथ रहे थे. वह जुदा हो रही थी. शांति ने शादी में आने कान वादा भी ले लिया था.

शांति भी अपनी शादी की तैयारियों में व्यस्त हो गई. देखते-देखते कार्ड भी बट गए. अब इंतजार था तो केवल बरात का. शादी का दिन काफी करीब आ गया था. शादी की तैयारी मैं सभी व्यस्त हो गए. तभी पता चला मोहन कहीं चला गया है. कहां गया किसी को पता नहीं चल पाया. शांति भी काफी बेचैन थी.

देखते देखते शादी का दिन काफी करीब आ गया था. अब तो घबराहट हो रही थी. तुम चिंता मत करो आ जाएगा. स्वाति से जब भी बात करती. वो यही कहती थी. देखते देखते शादी का दिन भी आ गया. शादी की तैयारियां धरी की धरी रह गई. एक तूफान आ गया था.

मोहन के घर वालों ने माफी मांग ली थी. उन्हें भी कुछ पता नहीं था. एक धोखे से सारा घर बिखर गया था. देखते देखते बाबूजी को दिल का दौरा पड़ गया. काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका. घर में सब कुछ बिखर गया था. अब घर में सन्नाटा फैल गया था. शांति को हमेशा लगता आज मेरी वजह से मां का यह हाल हो गया. उसे कभी कभी अपने आप से नफरत सी हो जाती, मगर वह सोचती मां का क्या होगा इसलिए उसने कभी शादी नहीं करने का प्रण ले लिया. लोगों ने काफी समझाया पर वह तैयार नहीं हुई, थक हार कर उसे उसके साथ छोड़ दिया. अब कॉलेज जाना फिर से शुरू हो गया था. फर्क सिर्फ इतना था कि पहले उत्साहित रहती थी. अब उसे लगता बस ड्यूटी करने जा रही है. अंदर से बिल्कुल खामोश हो गए थी.

अगर कोई भी लड़की थोड़ा भी लेट क्लास में आती तो चिल्ला पढ़ती थी. जो लड़कियां कल तक उसे अपना आदर्श मानती थी आज वह सब डरने लगी थी. देखते देखते 20 साल गुजर गए. शांति अब पहले से थोड़ी ठीक हो गई थी. अब वह प्रोफेसर बन गई थी.

तभी उसे कानपुर एक सेमिनार में जाने का न्योता मिला. उसने सोचा इसी बहाने स्वाति से भी मुलाकात हो जाएगी. जब वह कानपुर पहुंची उसने अपनी दोस्त को फोन किया पर उसकी दोस्त ने कोई जवाब नहीं दिया. फिर उसने निश्चय कर लिया जब उसके सारे काम खत्म हो जाएंगे तब फोन करूंगी. इस बार स्वाति ने फोन उठा लिया उसने जब घर आने की बात की तो स्वाति ने उसे मॉल में ही बुला लिया. वहां उसने साथी को देखा और गले से लिपट गई. उसे ऐसा लगा जैसे उसके शरीर में जान आ गई हो. वह काफी खुश थी.

शांति बार-बार उसके घर जाने को कह रही थी, आखिर बहुत दबाव के बाद स्वाति तैयार हो गई. मगर उसके चेहरे का रंग उड़ गया था. स्वाति ने घंटी बजाई. सामने मोहन खड़ा था. अब तो शांता को ऐसा झटका लगा कि वह संभल नहीं पाई. जिस सहेली पर जान छिड़कने थी. उसी सहेली ने इतना बड़ा धोखा दिया था. जो सहेली उसके घाव पर मरहम पट्टी करती रही, उसने खुद ही वह घाव दिया था.

शांति उल्टे पैर वापस आ गई. स्वाति लाख मनाती रही पर वह नहीं मानी. मानती भी कैसे जिसने उसकी खुशियां उजाड़ दी थी. वह उसको एक पल में कैसे माफ कर देती. वह अपने घर वापस आ गई. उसने कभी भी कानपुर ना आने का प्रण कर लिया और स्वाति से भी दोस्ती का रिश्ता तोड़ लिया था. उसकी सहेली ने ही उसे धोखा देकर उसको बर्बाद कर दिया था. आज उसे बार-बार लग रहा था काश मैंने दिमाग से काम लिया होता?

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