रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आजादी के बाद देश के नवनिर्माण और अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद रही 28 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को अपने पूंजीपति मित्रों के हाथों सौंपने वाली सरकार के सिपहसलार इसके फायदे गिनवा रहे हैं. केंद्र में सत्ता में बैठे जिन भाजपा नेताओं ने अपने निजी स्वार्थ के लिए कुछ सहयोगी व्यवसायिक मित्रों के हाथों देश के हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और एलाईसी तक को बेच डाला, उनकी नजर अब झारखंड पर गिद्ध दृष्टि की तरह पड़ गयी है.
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जब पूरी दुनिया में आर्थिक गतिविधियां ठप्प है, तब कोल ब्लाॅक आवंटन और नीलामी का क्या मतलब है, यह आम आदमी भी समझता सकता है. उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून, भूमि अधिग्रहण कानून के साथ छेड़छेड़ करने वाली सरकार को जनदबाव में मुंह की खानी पड़ी थी, अब वे दूसरे रास्ते से झारखंड की संपत्ति को हड़पना चाहते है. उन्होंने कहा कि कोयला खनन का मामला सिर्फ केंद्र का विषय नहीं है, देश के संघीय ढांचे का सम्मान होना चाहिए और कोई भी निर्णय लेने के पहले राज्य सरकार से हर हाल में मशविरा किया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की नजर शुरू से ही झारखंड की जमीन और भूसंपदा पर लग चुकी है, इसलिए अडाणी को बांग्लादेश में फायदा पहुंचाने के लिए झारखंड में पावर प्रोजेक्ट के लिए औने-पौने दाम में जमीन दे दिया गया.
उन्होंने कहा कि रेलवे, बैंक, एयरपोर्ट, कोयला सबकुछ बेचने वाली सरकार को अर्श से फर्श पर भेजने का समय आ चुका है। महाराष्ट्र और गुजरात के पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाले प्रदेश भाजपा नेताओं में अगर थोड़ी भी शर्म और राज्य की जनता के लिए इमानदारी हो, तो चिट्ठी लिखने वाले नेतागण प्रधानमंत्री को पत्र लिखें, वरना राज्य की जनता के गंभीर जनआंदोलन का शिकार होना पड़ेगा।
19वर्षाें में 16 वर्ष तक शासन करने वाली भाजपा को यह जवाब देना चाहिए कि आधारभूत सुविधाओं का कितना विकास हो पाया। जिस तरह भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का पार्टी ने व्यापक विरोध किया था, कोल ब्लाॅक नीलामी का भी पार्टी सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि हाथी उड़ाने वाले, चूहा को पूरा बांध खिला देने वाले और कोविड-19 आपातकाल में भी भ्रष्टाचार करने वाले भाजपा नेताओं को अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए.

