रांची: आज का पंचांग, आपका दिन शुभ (मंगलमय) हो.
●कलियुगाब्द…..5121
●विक्रम संवत्…2076
●शक संवत्……1941
●रवि……..उत्तरायण
●मास……….फाल्गुन
●पक्ष…………..शुक्ल
●तिथी………पूर्णिमा
रात्रि 11.16 पर्यंत पश्चात प्रतिपदा
●सूर्योदय..प्रातः 06.41.00 पर
●सूर्यास्त..संध्या 06.34.15 पर
●सूर्य राशि………कुम्भ
●चन्द्र राशि………सिंह
●नक्षत्र……पूर्वाफाल्गुनी
रात्रि 01.05 पर्यंत पश्चात उत्तराफाल्गुनी
●योग………….धृति
दोप 04.53 पर्यंत पश्चात शूल
●करण………..विष्टि
दोप 01.11 पर्यंत पश्चात बव
●ऋतु………..बसंत
●दिन………सोमवार
आंग्ल मतानुसार :-
09 मार्च सन 2020 ईस्वी ।
तिथी विशेष :
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (होलिका) :-
◆ होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है. यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है. यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता हैं.
यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहां भी धूम धाम के साथ मनाया जाता हैं. पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है. दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है.
ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं. एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है. इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं.
होली के पर्व से अनेक कहानियां जुड़ी हुई हैं. इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की. माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था. अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था. उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी. हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था. प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा. हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती.
हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे. आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया. ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है.
अभिजीत मुहूर्त :-
प्रातः 12.13 से 01.00 तक ।
राहुकाल :-
प्रात: 08.12 से 09.40 तक ।
दिशाशूल :-
पूर्व दिशा- यदि आवश्यक हो तो दर्पण देखकर यात्रा प्रारंभ करें ।
★ शुभ अंक………9
★ शुभ रंग……काला
चौघडिया :-
प्रात: 06.43 से 08.12 तक अमृत
प्रात: 09.40 से 11.08 तक शुभ
दोप. 02.04 से 03.32 तक चंचल
अप. 03.32 से 05.01 तक लाभ
सायं 05.01 से 06.29 तक अमृत
सायं 06.29 से 08.01 तक चंचल ।
आज का मंत्र :-
|| ॐ दिव्यदेहाय नम: ||
सुभाषितानि :-
मदोपशमनं शास्त्रं खलानां कुरुते मदम् ।
चक्षुः प्रकाशकं तेजः उलूकानामिवान्धताम् ॥
◆ अर्थात :- आंख को प्रकाश देनेवाला तेज, घुवड़ को अंधेरा देता है; वैसे हि मद को शांत करनेवाला शास्त्र दृष्टों में मद उत्पन्न करता है.
आरोग्यं :-
◆ कान का दर्द :- अदरक का रस कान में डालने से कान के दर्द, बहरेपन एवं कान के बंद होनेपर लाभ होता है.
◆ कान में आवाज होने पर : – लहसुन एवं हल्दी को एक रस करके कान में डालने पर लाभ होता है। कान बंद होने पर भी यह प्रयोग हितकारक है.
◆ कान में कीड़े जाने पर :- दीपक के नीचे का जमा हुआ तेल अथवा शहद या अरण्डी का तेल या प्याज का रस कान में डालने पर कीड़े निकल जाते हैं.

