रांची: ग्यारह जनवरी का दिन झारखंड की राजनीति के लिहाज से खास है. इस दिन राज्य के पूर्व दो मुख्यमंत्रियों का जन्मदिन है. राज्यसभा सांसद और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अध्यक्ष शिबू सोरेन और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का जन्मदिन एक ही दिन यानी 11 जनवरी है. महाजनी प्रथा के खिलाफ बिगुल फूंक कर राजनीति में आए शिबू सोरेन झारखंड के सर्वमान्य एवं शीर्षस्थ नेता हैं. प्यार से लोग उन्हें दिशोम गुरु भी कहते हैं. सोमवार 11 जनवरी को शिबू सोरेन अपना 77 वां जन्मदिन मनाएंगे. इन दिन उनपर लिखी तीन पुस्तकों का विमोचन शिबू सोरेन के बेटे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे. वहीं मोरहबादी स्थित अपने आवास पर शिबू सोरेन केक काटकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अपना जन्मदिन मनाएंगे.
शिबू सोरेन के जीवन को देखें तो वो हमेशा संघर्ष और अलग झारखंड राज्य के पुरोधा के रूप में जाने जाते हैं. भले ही मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने लंबी पारी नहीं खेली बावजूद इसके झारखंड का सबसे मजबूत राजनीतिक परिवार उनका ही है. वो खुद राज्यसभा के सदस्य हैं तो बेटे हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री हैं. वहीं बड़ी बहू सीता सोरेन और छोटे बेटे बसंत सोरेन विधायक हैं. दिशोम गुरु की पत्नी रूपी सोरेन जेएमएम की उपाध्यक्ष हैं. राजनीतिक सफलता के शिखर पर होने के बावजूद गुरुजी यानी शिबू सोरेन का वृहत झारखंड का सपना अभी भी अधूरा है. दरअसल शिबू सोरेन ने जिस झारखंड के लिए संघर्ष किया था उसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ का कुछ हिस्सा भी शामिल था जिसे वो वृहत झारखंड के नाम देते थे.
11 जनवरी को शिबू सोरेन और बाबूलाल मरांडी का जन्मदिन
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विधानसभा में बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी का भी 11 जनवरी को जन्मदिन है. किसान परिवार में जन्मे बाबूलाल मरांडी ने गिरिडीह के देवरी में प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षक नौकरी की. फिर विभागीय अधिकारियों से कुछ ऐसी बात हो गई कि शिक्षक बाबूलाल मरांडी ने राजनीति की राह पकड़ ली. विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय होने के बाद बाबूलाल मरांडी वर्ष 1990 में बीजेपी के संथाल परगना के संगठन मंत्री के रूप में काम किया. दो बार दिशोम गुरु से चुनावी समर में पराजित होने के बाद वर्ष 1998 में उन्होंने शिबू सोरेन को और फिर 1999 में उनकी पत्नी रूपी सोरेन को हराकर अपनी राजनीतिक धाक जमाई.
केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में बाबूलाल मरांडी मंत्री बने, और जब नवंबर 2000 में झारखंड राज्य अस्तित्व में आया तो बीजेपी आलाकमान ने विश्वास जताते हुए उन्हें राज्य की बागडोर सौंप दी. बाद में दलगत मतभेद के बाद वर्ष 2016 में उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा नाम से अपनी एक अलग पार्टी बनाई और संघर्ष किया. इसके 14 साल बाद 2020 में उन्होंने अपने दल को बीजेपी में विलय कर लिया और एक बार फिर झारखंड में बीजेपी के सर्वमान्य नेता बन गए.
दोनों वैचारिक रूप से अलग धुरी पर खड़े रहे, मगर उनमें कई समानताएं भी
दिशोम गुरु शिबू सोरेन और बाबूलाल मरांडी भले की वैचारिक रूप से ज्यादातर समय तक दो धुरी पर खड़े रहे हैं पर दोनों में कई समानताएं हैं. कोरोना काल में पहली समानता तो यही है कि दोनों कोरोना वायरस पॉजिटिव हुए और फिर संक्रमण को मात दी. राजनीतिक जीवन की बात करें तो राज्य का मुख्यमंत्री पद दोनों के लिए संघर्षों से भरा रहा. शिबू सोरेन कई दफा मुख्यमंत्री बने पर उनका कार्यकाल किसी न किसी वजह से लंबा नहीं रहा. तो बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे पर उसके बाद वो लगातार सत्ता के इस सर्वोच्च पद को पाने के लिए संघर्ष करते दिखे पर कामयाबी नहीं मिली.
बाबूलाल मरांडी का 63वां जन्मदिन मनाने के लिए उनके समर्थकों ने चिरौधी के स्वागतम बैंक्वेट हॉल में व्यवस्था कर रखी है. मगर खुद बाबूलाल मरांडी रांची के बहूबाजार के पास ब्लाइंड स्कूल के नेत्रहीन बच्चों के साथ अपना बर्थडे मनाएंगे.

