रांची: लॉकडाउन को लेकर झारखंड सरकार ने ट्रेजरी से निकासी के लिए नया आदेश जारी किया है. यह मई से अगले आदेश तक के लिए जारी रहेगा. जारी आदेश में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल ने आदेश में लिखा है कि वर्तमान समय में COVID-19 महामारी के प्रभाव के कारण संपूर्ण देश में लॉकडाउन है.
लॉकडाउन के कारण राजस्व संग्रहण में संभावित कमी को देखते हुए राज्य में होने वाले व्यय पर नियंत्रण किया जाना आवश्यक है. व्यय को नियंत्रित करने के लिये सरकार द्वारा 4 अप्रैल, 2020 को आदेश निर्गत किये गये थे. इस क्रम में मई, 2020 से अगले आदेश तक ये शर्तें लागू रहेगी.
निम्नलिखित विपत्र ही पारित किये जाने का हुआ है निर्णय
- प्रतिमाह वेतनादि एवं मानदेय/संविदा राशि/ पारिश्रमिक (Outsource कर्मियों सहित) विपत्र. पूर्व के किसी भी प्रकार के बकाये की निकासी नहीं की जायेगी
- सेवानिवृत्ति लाभ एवं पेशन विपत्र
- स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्माण कार्य को छोड़कर कर अन्य विपत्र
- खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के खाद्यान्न से संबंधित विपत्र.
- महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के Supplementary Nutrition से संबंधित विपत्र एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन के विपत्र
- COVID-19 के नियंत्रण के लिए किये कार्यों से संबंधित विधि व्यवस्था एवं आपदा प्रबंधन के आवश्यक विपत्र
- स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के Midday Meal से संबंधित विपत्र
- कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के निर्माण कार्य को छोड़कर कृषि, उद्यान, मत्स्य पशुपालन में बीज, कीटनाशक दवाएं
- खाद्य, आवश्यक कृषि उपकरण एवं कृषि प्रसार संबंधी आवश्यक गतिविधि से संबंधित विपत्र
- सभी केंद्रीय योजना तथा 14वें और 15वें वित्त आयोग से संबंधित व्यय
- कार्यालयों में आवश्यक कार्यों और पारिश्रमिक के भुगतान के लिये मई 2020 से प्रतिमाह कार्यालय व्यय, दूरभाष मद, मशीन एवं उपकरण मद और ईंधन एवं मरम्मत मद में कुल बजट उपबंध का अधिकतम 3 प्रतिशत राशि की ही निकासी की जा सकेगी
- PL खाता से निकासी में भी उपर्युक्त कंडिकाओं में वर्णित शर्त लागू रहेगी
उपरोक्त के अतिरिक्त अगर किसी राशि का विपत्र पारित करना अति आवश्यक होगा, तो प्रशासी विभाग औचित्य के साथ प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजेंगे.
वित्त विभाग की अनुमति के पश्चात ही विपत्र पारित किया जायेगा. निर्माण कार्य से संबंधित कोई भी विपत्र पारित नहीं किये जायेंगे. इसका पालन दृढ़ता से सुनिश्चित कराने को कहा गया है.



