रांची: मांडर विधायक बंधु तिर्की ने झारखंड हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में आदिवासी, मूलवासी, अल्पसंख्यकों व स्थानीय वकीलों की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ऐेसा प्रतीत होता है कि विधि सचिव और उनके अधीनस्थ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री सह विधि मंत्री को गुमराह किया और षड्यंत्र कर अधिसूचना जारी करायी है.
उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट में इस बार कुल नवनियुक्त सरकारी वकीलों की संख्या 31 है, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से मात्र पांच का ही चयन किया गया है, जो मूल झारखंडी खतियानी रैयती वशंज हैं. बाकी सभी दूसरे राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के निवासी हैं. बंधु तिर्की ने कहा कि पांच झारखंडियों को छोड़ सभी बाहरी हैं और आश्चर्य इस बात का है कि एक भी कुड़मी महतो वकील की नियुक्ति नहीं की गई.
बंधु तिर्की ने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा से 1932 के खतियान की वकालत करते आ रहे हैं और सरकारी वकीलों से संबधित जारी अधिसूचना में झारखंडी आदिवासी, मूलवासी और अल्पसंख्यकों का चयन नहीं होना, उनकी सोच को खोखला साबित करता है. बंधु तिर्की ने कहा कि वह हतप्रभ हैं कि मुख्यमंत्री ने कैसे ऐेसा गैर जिम्मेदाराना कदम उठाया. उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी अल्पसंख्यकों और स्थानीय के हित के लिए उस जारी अधिसूचना को रद्द कर पुनर्विचार करें.

