रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि वैश्विक कोरोना महामारी संकट के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जिस विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की गयी है, उस पैकेज से अधिक राशि सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ा कर वसूला जा रहा है. इसका सीधा असर गरीब और निम्न मध्यवर्गीय परिवार को भुगतना पड़ रहा है.
आलोक कुमार दूबे ने बताया कि वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार बनी थी, उस वक्त पेट्रोल पर प्रति लीटर उत्पाद शुल्क 9.41 रुपया और डीजल पर 3.55 रुपया था, लेकिन आज पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 23.50 रुपया और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़कर 18.27रुपये हो गया है.
केंद्र सरकार द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन के बीच भी उत्पाद शुल्क में भी भारी बढ़ोत्तरी की गयी. जिससे खेती कार्य के लिए डीजल पंप का इस्तेमाल करने वाले किसानों पर बोझ बढ़ा है.
वहीं देश में आज अधिकांश निम्नमध्यवर्गीय परिवार द्वारा ही पेट्रोल से चलने वाली मोटरसाईकिल का इस्तेमाल किया जाता है, उनके घर का भी बजट गड़बड़ गया है.
डीजल की कीमत में बढ़ोत्तरी से मालवाहक वाहनों के भी भाड़े की दर में बढ़ोत्तरी की गयी है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बेहताशा वृद्धि हो रही है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ने कहा कि सिर्फ जून 2020 में ही पेट्रोल की कीमत में 8.50 रुपये और डीजल की कीमत में करीब 10 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, स्थिति इतनी खराब हो गयी है कि अब पेट्रोल और डीजल की कीमत लगभग सामान्य होती जा रही है.
जबकि कांग्रेस की पूर्ववती सरकार और यूपीए शासनकाल में किसानों को परेशानी न हो, इसे लेकर हमेशा डीजल की कीमत को कम रखने का प्रयास किया गया था.
लेकिन आज जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, उसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमत में प्रति दिन कुछ पैसे या एक-दो रुपये की बढ़ोत्तरी की जा रही है, इससे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट होती जा रही है. उन्होंने कहा कि पार्टी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ सड़क पर उतर कर जनता के साथ आंदोलन करेगी.

