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दो वंशों को रौशनी दे गई वंशिका

by bnnbharat.com
July 18, 2020
in समाचार
दो वंशों को रौशनी दे गई वंशिका
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  • ‘सामाजिक दायित्व निर्वहन की अनूठी मिसाल दे गया एक जनजातीय दंपति’

रांची: ‘जिनके दिलों में रौशनी होती है उनके जीवन में कभी अंधेरा नहीं होता’ इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है गुमला जिले के चंद्र प्रकाश पन्ना और उनकी धर्मपत्नी सुरेखा पन्ना ने.

विगत शुक्रवार को तो जैसे उनके ऊपर दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा. सुलेखा, जो एक बैंक में काम करती हैं अपने काम पर गयी थीं और उनकी दो वर्षीय एकमात्र पुत्री वंशिका, अपने दोस्तों के साथ घर की बालकनी पर खेल रही थी.

अचानक वह किसी प्रकार गिर पड़ी और गंभीर रूप से घायल हो गई. उसके पिता और माता ने आनन-फानन में एक कार किराए पर ली और 100 किलोमीटर यात्रा कर, उसके बेहतर इलाज के लिए उसे रानी चिल्ड्रन हॉस्पिटल रांची ले आए.

परन्तु दुर्भाग्य से डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. तभी इस दंपति ने कुछ निश्चय किया और बिना मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रतीक्षा किए वे तुरंत अपनी बच्ची को लेकर कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल पहुंचे.

उन्होंने अपनी बच्ची की नेत्रों का दान करके उसे अमर रखना चाहते थे. एक ओर उनकी आंखों में आंसू थे तो दूसरी ओर किसी की अंधी दुनिया में रोशनी लाने का नायाब सपना भी था.

कश्यप मेमोरियल आई बैंक की निदेशिका डॉ. भारती कश्यप, जो एक जानी मानी नेत्र चिकित्सक तथा लब्ध प्रतिष्ठित और सम्मानित सामाजिक सरोकार सम्पन्न महिला हैं, उनके लिए यह एक अति विशिष्ट घटना थी.

उन्होंने बताया कि इसके पहले एक पिता ने जब अपनी पुत्री श्रेया का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट गये थे, तो अनायास ही उन्होंने वहीं नेत्रदान का निश्चय किया.

तब वो उसके नेत्र प्राप्त करने गयी थीं और दूसरी बार राजधानी एक्सप्रेस से दुर्घटनाग्रस्त हुई नव व्याहता नेहा बजोरिया का नेत्र प्राप्त करते हुए भी अका मन कसक उठा था,  किंतु इस घटना ने तो उनके अंतस को ही झकझोर कर रख दिया.

वाकई सामाजिक  दायित्व कि इतनी गहरी समझ और इतना समर्पण विरले ही देखने को मिलता है जो गुमला की इस आदिवासी दम्पत्ति ने कर दिखाया.

दंपत्ति की ईच्छा का सम्मान करते हुए कश्यप मेमोरियल आई बैंक की डॉ. निधि घटकर कश्यप ने वंशिका के दोनों नेत्र सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिये तथा इस क्रम में उसके चेहरे पर कोई विकृति नहीं आने दी. भविष्य में इन नेत्रों को जरुरतमंद की आंखों में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा.

बताते चलें कि चंद्रप्रकाश और सुलेखा पन्ना को 40 वर्ष की उम्र में यह एकमात्र संतान प्राप्त हुई थी, जो अब उनके बीच भले ही नहीं है लेकिन उस वंशिका ने वंशों को रोशनी की वह सौगात दे दी है, जो न सिर्फ उसे बल्कि इस दंपति को भी हमेशा अमर रखेगी.

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