रांची:- राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि झारखंड कांग्रेस (Jharkhand Congress) के विधायक वर्तमान सरकार और संगठन से नाराज चल रहे हैं. हाल के दिनों में कांग्रेस विधायकों और पूर्व सांसदों के बयान ने इन अटकलों को और हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इस बीच शनिवार को रांची से दूर कांग्रेस के 15 विधायक पिकनिक के बहाने बंद कमरे में बैठे, तो इस चर्चा को और बल मिल गया. प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता भी ये मानते हैं कि अफवाहों का बाजार गर्म है, पर हम एकजुट हैं. वैसे कुछ नेता सुभाषचंद्र बोस के जमाने की याद ताजा कर खुद को तस्सली देने में लगे हुए हैं. कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह पिछले तीन दिन से कांग्रेस विधायकों का नब्ज टटोलने में जुटे हुए हैं. हालांकि इनकी ये कोशिश मुट्ठी में रेत पकड़ने जैसी ही है. कांग्रेस के बड़े नेता जो कह रहे हैं उसकी हकीकत विधायक इरफान अंसारी और उमाशंकर अकेला के बयान से समझी जा सकती है. दरअसल कांग्रेस विधायकों को इस बात का मलाल है कि वे एक थानेदार तक को हटा नहीं पा रहे हैं. बीजेपी के शासनकाल के दौरान पदस्थापित अधिकारी आज भी उसी जगह पर डटे हुए हैं. अगर उनकी सुनी ही नहीं जा रही है, तो इस नई सरकार से क्या फायदा.
विधायक इरफान अंसारी अपने साथी विधायक का नाम लेकर अकेले ही चल पड़ने की ओर इशारा कर रहे हैं. राजनीति में इशारा काफी होता है. बीजेपी छोड़कर कांग्रेस के टिकट पर बरही से चुनाव जीतने वाले उमाशंकर अकेला के बोल भी कुछ कम नहीं हैं. अकेला ये बताने में लगे हैं कि विधायक से ऊंची चीज कोई नहीं. विधायक से ही मंत्री है और विधायक से ही मुख्यमंत्री. जरूरत पड़ी तो सबको हिला देंगे. अब अगर राजनीति में हिलाने-डुलाने तक की बात शुरू हो गई हो तो समझ लीजिए भविष्य में क्या कुछ होने वाला है.

