रांची. केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी ’जीआई महोत्सव’ का उद्घाटन किया गया. एलबीएसएनएए, मसूरी के मुख्य द्वार के पास वेलरिज बिल्डिंग में 130वां ट्राइब्स इंडिया शोरूम एंड कैफे खोला गया .
इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री के सलाहकार भास्कर खुल्बे; संजीव चोपड़ा, निदेशक, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) प्रवीर कृष्ण, प्रबंध निदेशक, ट्राईफेड और पद्मश्री डॉ. रजनी कांत, सलाहकार, जीआई उत्पाद आत्मनिर्भर भारत परियोजना, ट्राईफेड; की उपस्थिति में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) मसूरी में ट्राइब्स इंडिया जीआई महोत्सव का भी उद्घाटन किया गया .
ट्राइब्स इंडिया जीआई महोत्सव अतुल्य भारत का अमूल्य खजाना’ जीआई टैग उत्पादों की एक प्रदर्शनी है तथा 40 से अधिक जीआई पंजीकृत प्रोप्राइटर, जीआई अधिकृत उपयोगकर्ता और जनजातीय कारीगर इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं और अपने-अपने क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे हैं. “जीआई महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों में इन उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए देश भर के विभिन्न जीआई उत्पादों को प्रदर्शित करना है, ताकि वे अपने पदस्थापन क्षेत्र में जीआई उत्पादों के हितों की रक्षा के लिए नीतियां तैयार कर सकें इस तरह के आयोजन पंजीकृत उत्पादकों या निर्माताओं को विपणन के अधिक अवसर प्रदान करेंगे. 190 से अधिक प्रशिक्षु अधिकारियों और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) के 30 से अधिक संकाय सदस्यों ने इस प्रदर्शनी में भाग लिया और प्रदर्शित उत्पादों की सराहना की.
इस अवसर पर, अर्जुन मुंडा ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) मसूरी के मुख्य द्वार के पास वेलरिज बिल्डिंग में 130वें ट्राइब्स इंडिया शोरूम एंड कैफे का भी उद्घाटन किया यह शोरूम जीआई उत्पादों, विभिन्न राज्यों के उच्च गुणवत्ता वाले दस्तकारी डिजाइनों और जैविक उत्पादों का विपणन और प्रचार-प्रसार करेगा. और इस कैफे में, प्रशिक्षु अधिकारी देश की बेहतरीन कॉफी, जिसमें आंध्र प्रदेश की अराकू कॉफी भी शामिल है और जनजातीय समुदाय द्वारा बनाए गए जैविक स्वास्थवर्धक कुकीज़ का भी स्वाद ले सकते हैं. इस अवसर पर, पोचमपल्ली के बुनकरों द्वारा प्रचलित पारंपरिक ज्यामितीय इकत बुनाई शैली में तैयार ट्राईफेड जैकेट्स का भी लोकार्पण किया गया.
अपराह्न सत्र बहुत ही जीवंत तथा आकर्षक था, जिसमें प्रख्यात गणमान्य व्यक्तियों ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया तथा जीआई उत्पादों के बारे में जानकारी दी . केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया तथा इस तरह के आयोजनों के महत्व के बारे में बात की और साथ ही बतलाया कि जीआई टैग उत्पादों का प्रचार-प्रसार एवं विपणन किस प्रकार भारत की विविध परंपरा, कला और शिल्प को बाजारों तक लाने में और अपनी शानदार विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा. प्रशासनिक सहायता हमेशा इन उत्पादकों के मनोबल को बढ़ाने में मदद करेगी. श्री मुंडा ने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजनों में वार्तालाप के माध्यम से, ये प्रशिक्षु अधिकारी वास्तविक चुनौतियों के बारे में अमूल्य अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकेंगे और जब वे अपने राज्यों में काम करना शुरू करेंगे तो और अधिक संवेदनशील बन सकेंगे. इस आयोजन को अपनी तरह का पहला आयोजन बताते हुए श्री मुंडा ने कहा, “जीआई महोत्सव कर आयोजन, जहां बहुत से जनजातीय कारीगर तथा जीआई अधिकृत विक्रेता मौजूद हैं और अपने-अपने क्षेत्र के विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे हैं, माननीय प्रधान मंत्री की “वोकल फॉर लोकल“ और “आत्मनिर्भर भारत“ परिकल्पनाओं के कार्यान्वयन में एक उल्लेखनीय कदम है. मैं इस अनूठे कदम के लिए ट्राईफेड, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) और संस्कृति मंत्रालय को बधाई देता हूं.“
इसी सत्र में इससे पहले, पद्मश्री डॉ. रजनी कांत, सलाहकार, जीआई उत्पाद आत्मनिर्भर भारत परियोजना, ट्राईफेड ने प्रशिक्षु अधिकारिओं को भारत भर में जीआई उत्पादों की स्थिति और जीआई टैगिंग के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी दी.
ट्राईफेड के प्रबंध निदेशक, प्रवीर कृष्ण ने इस बात पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी कि ट्राईफेड ने जनजातीय विकास के लिए क्या-क्या रणनीतियां बनाई हैं. अपनी प्रस्तुति में उन्होंने बताया कि कैसे जीआई टैगिंग जनजातीय समुदाय की परंपराओं तथा विरासत को संरक्षित करने में मदद कर सकती है और ट्राईफेड कैसे इस समुदाय को वाणिज्य के अवसरों के साथ जोड़ने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम चला रहा है. उन्होंने यह भी बताया “भारत में स्वदेशी उत्पादों की एक विशाल विरासत है, चाहे वह हस्तशिल्प हो, या हथकरघा या फिर कोई अन्य उत्पाद . जीआई टैगिंग जनजातीय कारीगरों की सहायता करने के साथ-साथ विपणकों को अपने व्यवसाय को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए प्रेरित करता है. इसी दृष्टिकोण के मद्देनजर, ट्राईफेड जीआई टैग उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य विभागों के साथ साझेदारी कर रहा है, और यह नवीनतम प्रदर्शनी इस दिशा में सिर्फ एक कदम है.“
इस अवसर पर, यह भी घोषणा की गई कि ट्राईफेड एक जीआई आत्मनिर्भर परियोजना की शुरुआत करेगा जिसमें 50 जीआई टैग किए गए उत्पाद शामिल होंगे जिनका विपणन ट्राइब्स इंडिया द्वारा किया जाएगा डॉ. रजनी कांत इस परियोजना के लिए मुख्य परामर्शदाता होंगे और वे देश भर से चिन्हित 54 संभावित उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त करने और अन्य जनजातीय उत्पादों की पहचान करने में भी मदद करेंगे.
सत्र के दौरान, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए ) के निदेशक श्री संजीव चोपड़ा ने कहा, कि “ऐसा पहली बार हुआ है कि देश भर के जीआई टैग उत्पादों की इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन यहां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी ( एलबीएसएनएए) में किया गया है. यह एक बहुत ही सार्थक पहल है और हम इसकी सराहना करते हैं क्योंकि इससे यहां के युवा प्रशिक्षु अधिकारियों की जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे न केवल उन्हें हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में पता चलेगा, इससे उन्हें अपने संबंधित कार्यक्षेत्र में माननीय प्रधान मंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में कदम उठाने में भी मदद मिलेगी.
प्रधान मंत्री के सलाहकार भास्कर खुल्बे ने भी इस अनूठे आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा, “इस तरह की पहल निश्चित रूप से एक व्यापक अनावरण और बड़े बाजार प्रदान कर जनजातीय कारीगरों को सशक्त बनाएगी.“
आयोजन के दौरान, प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी प्रदर्शनी में उपस्थित जीआई पंजीकृत प्रोपराइटरों, जीआई अधिकृत उपयोगकर्ताओं तथा कारीगरों से बातचीत की और उनके सामने आने वाली चुनौतियों व मुद्दों के बारे में जानकारी ली और उत्पादों के बारे में समग्र समझ प्राप्त की.
इसी के साथ-साथ प्रशिक्षु अधिकारियों द्वारा भी एक जनजातीय फैशन शो का प्रदर्शन किया गया. इसके साथ-साथ, पूरे दिन जनजातीय व्यंजनों को भी प्रदर्शित किया गया जिनका सभी ने आनंद लिया. पिछले कुछ वर्षों में, भौगोलिक संकेतन या जीआई टैगिंग का एक विशेष महत्व बन गया है. भौगोलिक संकेतन को पंजीकृत करना उत्पादकों व कारीगरों को एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित विशिष्ट उत्पादों के लिए सुरक्षा की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित करता है और विपणक को अपने व्यवसाय का राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने के लिए प्रेरित करता है. मेक इन इंडिया’ उत्पादों में विश्व प्रसिद्ध दार्जिलिंग चाय, मैसूर सिल्क, चंदेरी साड़ी, बनारसी ब्रोकेड, पोचमपल्ली, विभिन्न मसाले, उड़ीसा पटचित्र, वर्ली पेंटिंग, अरकु वैली कॉफी, कुल्लू शॉल, जयपुर ब्लू पॉटरी, नागा मिर्च ( जिसे भूट जोलोकिया के नाम से भी जाना जाता है) और कई अन्य उत्पाद शामिल हैं.
ट्राईफेड, एक राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में, जनजातीय समुदाय द्वारा सदियों से उत्पादित स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और उनका विपणन करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य कर रही है. ट्राईफेड जहां एक ओर जनजातीय समुदाय की आय तथा आजीविका में सुधार लाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है, वहीं उनके जीवन-मूल्यों व परंपराओं का संरक्षण भी कर रहा है.

