अधिवक्ता ने कहा- जमानत मिलने पर लालू प्रसाद को रांची आने की नहीं होगी जरुरत
रांची: चारा घोटाले के दुमका कोषागार मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर अब पांच फरवरी को सुनवाई होगी.
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद के वकील ने आधी सजा पूरी होने को आधार बताते हुए लालू प्रसाद के जमानत की मांग की. इसका सीबीआई के वकील ने विरोध किया और जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट से समय देने का आग्रह किया. इस पर अदालत की तरफ से सीबीआई को जवाब दाखिल करने का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई की तिथि 5 फरवरी निर्धारित की.
अदालत में लालू प्रसाद की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि अदालत ने पांच फरवरी को हर हाल में सीबीआई को अपना पूरा पक्ष रखने का निर्देश दिया है. उन्होंने बताया कि लालू प्रसाद की ओर से जमानत को लेकर 25 जनवरी को कॉपी सौंपी गयी थी, लेकिन सीबीआई के अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि उन्हें इसकी प्रति 26 जनवरी को उनके कार्यालय में मिली और इस मामले में अदालत में पक्ष दाखिल करने के लिए सीबीआई की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया जाए.
प्रभात कुमार ने बताया कि उनके अनुसार लालू प्रसाद ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में 44 महीने से अधिक की सजा काट चुके है, जो दुमका कोषागार में सुनवाई गयी सात साल की सजा में से आधी से अधिक है ,इसलिए उन्हें यह उम्मीद है कि अगली सुनवाई में उनके मुवक्किल को जमानत मिल जाएगी.
लालू प्रसाद के अधिवक्ता ने बताया कि लालू प्रसाद का अभी न्यायिक हिरासत में ही दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा है और यदि उन्हें जमानत मिल जाती है, तो फिर रांची आने की जरुरत नहीं होगी. निचली अदालत से जमानत संबंधी आदेश जेल प्रशासन को मिल जाएगा और जेल प्रशासन दिल्ली में अपने पदाधिकारियों को सूचित करेगा, जिसके कारण लालू प्रसाद को जमानत मिलने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए रांची आने की जरुरत नहीं होगी, हालांकि जमानत मिलने के बाद यदि लालू प्रसाद यदि रांची आना चाहेंगे, तो यह उनकी इच्छा पर निर्भर होगा.
उन्होंने बताया कि अदालत ने अंतिम सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित की है. प्रभात कुमार ने बताया कि सिर्फ सजा की आधी अवधि पूरा होने को ही आधार बनाते हुए जमानत की अर्जी दाखिल की गयी है और स्वास्थ्य को आधार नहीं बनाया गया है.
गौरतलब है कि दुमका कोषागार से जुड़े इस मामले में लालू प्रसाद को 7 साल की सजा सुनायी गयी. लालू प्रसाद की ओर से सजा की आधी अवधि काट लिये जाने का ब्यौरा शपथपत्र के माध्यम से दाखिल किया गया है. यदि इस मामले में उन्हें जमानत मिल जाती है, तो उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो जाएगा. इससे पहले लालू प्रचार को चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े दो और देवघर कोषागार से जुड़े एक मामले में आधी सजा काट लेने के कारण जमानत मिल चुकी है.

