रांची: चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद को दुमका कोषागार मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिल गयी है. अब साढ़े तीन साल बाद जेल से बाहर आएंगे.
लालू प्रसाद ने इस मामले में आधी सजा पूरी कर ली थी, लेकिन जमानत के लिए उन्हें कई बार अदालत में याचिका दायर करनी पड़ी. लालू प्रसाद को चाईबासा कोषागार से जुड़े दो मामले और देवघर के एक मामले में पहले से ही जमानत चुकी है. दुमका कोषागामार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में जमानत मिलने के बाद अब उनके जेल से बाहर निकलने का रास्ता साफ हो गया.
लालू प्रसाद का फिलहाल दिल्ली स्थित एम्स में इलाज चल रहा है. उन्होंने बताया कि अदालत के फैसले की कॉपी मिलते ही जेल अधीक्षक को उपलब्ध करा दी गयी और जेल अधीक्षक द्वारा दिल्ली में आदेश की कॉपी भेज कर लालू प्रसाद को न्यायिक हिरासत से रिहा करने के आदेश से अवगत कराएंगे. इस प्रक्रिया में एक-दो दिनों का समय लग सकता है.
👉 इन शर्तों को भी करना होगा पूरा–
जस्टिस अपरेश सिंह की अदालत में शनिवार को हुई सुनवाई में उन्हें जमानत मिली है. उन्हें एक लाख रुपए के निजी मुचलके और 10 लाख रुपए जुर्माना देना होगा. बेल बॉन्ड भरते ही वे एक दो दिन में बाहर आ जाएंगे.
हाईकोर्ट ने कहा है कि जमानत के दौरान लालू प्रसाद यादव देश से बाहर नहीं जाएंगे. देश से बाहर जाने से पहले उन्हें कोर्ट से अनुमति लेनी होगी. इसके साथ ही अपना मोबाइल नंबर और अपना पता नहीं बदलेंगे.
लालू प्रसाद यादव को ये जमानत दुमका कोषागार मामले में आधी सजा पूरी होने के बाद दी गई है. चाईबासा कोषागार से जुड़े दो मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल गई है.
👉 जानें पूरा घटनाक्रम-
🔹 पहला मामला
चाईबासा ट्रेजरी केस
-37.7 करोड़ रुपए अवैध निकासी का आरोप
-लालू प्रसाद समेत 44 अभियुक्त
-मामले में 5 साल की सजा
🔹 दूसरा मामला–
देवघर ट्रेजरी
-84.53 लाख रुपए की अवैध निकासी का आरोप
-लालू समेत 38 पर केस
-लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा
🔹 तीसरा मामला–
चाईबासा ट्रेजरी
-33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का आरोप
-लालू प्रसाद समेत 56 आरोपी
-5 साल की सजा
🔹 चौथा मामला–
दुमका ट्रेजरी
-3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का मामला
-दो अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा
👉 चारा घोटाले में कब-क्या हुआ?
🔹 27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट का पता चला. चाईबासा ट्रेजरी से गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गए थे.
🔹 11 मार्च 1996: पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की जांच के लिए CBI को निर्देश दिए.
🔹 19 मार्च 1996: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बेंच को निगरानी करने को कहा.
🔹 27 जुलाई 1997: CBI ने लालू प्रसाद यादव पर शिकंजा कसा.
🔹 30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद ने CBI अदालत के सामने सरेंडर किया.
🔹 19 अगस्त 1998: लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति का मामला दर्ज कराया गया.
🔹 4 अप्रैल 2000: लालू के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया.
🔹 5 अप्रैल 2000: लालू और राबड़ी ने सरेंडर किया, राबड़ी को जमानत मिली.
🔹 9 जून 2000: कोर्ट में लालू के खिलाफ आरोप तय हुए.
🔹 अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया. इसके बाद लालू ने झारखंड में सरेंडर किया.
🔹 18 दिसम्बर 2006: लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्लीन चिट मिली.
🔹 2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई. इस दौरान कई गवाहों की मौत हो गयी.
🔹 17 मई 2012: CBI कोर्ट में लालू नए आरोप तय हुए. इसमें दिसम्बर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका ट्रेजरी से 3.13 करोड़ रुपए की निकासी का मामला भी शामिल.
🔹 17 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा.
🔹 30 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव दोषी करार दिए गए.

