गोड्डा: प्रखंड क्षेत्र के राहा गांव में क्षेत्र के सुप्रसिद्ध सूफी संत हजरत सय्यद सुल्तान शाह रहमतुल्लाह का उर्स पूरे अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया. मालूम हो कि राहा गांव में प्रत्येक वर्ष के भांति इस वर्ष भी पिछले 5 मार्च को चादरपोशी तथा कुल शरीफ के साथ उर्स का शुरुआत किया गया.
ईशा की नमाज के बाद पूरे गांव से चादर घूमाते हुए क्षेत्र, प्रदेश तथा देश में शांति, अमन एवं खुशहाली के लिए मजार शरीफ पर चादर पोशी करते हए दुआ मांगी गई. वहीं बड़ी संख्या में मुसलमान भाइयों के साथ हिंदू भाइयों ने भी चादर पोशी में हिस्सा लिया.
चादर पोशी कार्यक्रम के बाद शानदार जलसे का आयोजन किया गया. जलसा मोहम्मद सुलेमान जहांगीर आजाद की निजामत में तथा मौलाना महमूद आलम मिस्बाही की नकाबत में संपन्न हुआ. जलसे में नेपाल से आए हुए चतुर्वेदी मौलाना इब्राहिम, रजा चतुर्वेदी ने वेद और कुरान के हवाले से हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवनी पर पूर्ण प्रकाश डालते हुए लोगों को सही रास्ते पर चलने का संदेश दिया.
उन्होंने कहा कि वेद एवं कुरान का यह सबसे मजबूत संदेश है कि आदमी में मानवता का गुण परिपूर्ण होते हुए एक दूसरे को भाई समझे. जलसे को देश के प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना डॉक्टर आरिफ इकबाल ने तकरीर करते हुए कहा कि औलिया अल्लाह अर्थात अल्लाह के दोस्त के नजदीक सभी लोग उनके बंदे हैं. उन्होंने कहा कि नमाज, रोजा, हज और जकात के साथ मुसलमानों को खैर अथवा भलाई के कार्यों में पूर्णरूपेण से भाग लेना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक मुसलमान का अपने अल्लाह के साथ अपने बंदों अर्थात भाइयों, तथा जीव धारियों पर हक है, उसका हक अदा किया जाना चाहिए.
जलसे में बिहार के सासाराम के मशहूर शायर फारुख सरैयावी एवं जुनैद अख्तर रायपुरी के साथ सबा गोड्डावी ने नात शरीफ और नजम पेश कर लोगों का दिल जीत लिया. जलसे को मौलाना नोमान रजा भागलपुरी ने भी संबोधित किया उर्स कार्यक्रम को सफल बनाने में मोहम्मद आलमगीर, गुलाम मुस्तफा कमाल, फारूक आजम, आफताब आलम, मोहम्मद जमाल, मोहम्मद मुख्तार, मोहम्मद मोहसिन की सराहनीय भूमिका रही.

