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भारतीय सीमा पर चीन के आक्रामक रवैये को लेकर बोला अमेरिका
अमेरिका: भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर अमेरिका ने चीन पर निशाना साधा है. विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ के बाद अब अमेरिका में विदेश मामलों की हाउस कमिटी के चेयरमैन एलियट एंगल ने भी चीन के रवैये को ‘आक्रामक’ बताया है और उससे कूटनीति के उपयोग की अपील की है.
एंगल ने कहा है कि वह भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की आक्रामकता से चिंतित हैं. उन्होंने कहा, ‘सभी देशों को एक से नियमों का पालन करना चाहिए ताकि हम ऐसी दुनिया में न रहें जहां केवल ताकत से फैसले किए जाते हैं. मैं चीन से अपील करता हूं कि नियमों का पालन करें और भारत के साथ सीमा के सवाल सुलझाने के लिए कूटनीति और मौजूदा तरीकों का इस्तेमाल करें.’
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने आरोप लगाया है कि चीन जमीनी स्तर पर अपनी ”रणनीतिक स्थिति” का अपने लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है और दूसरों के लिए खतरा पैदा कर रहा है. भारत के साथ लगी अपनी सीमा पर भी वह लंबे समय से इसी तरह की हरकत कर रहा है.
चीन-भारत सीमा पर और दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के आक्रामक रवैये के संबंध में ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ इंटरव्यू में एक सवाल पर पोम्पिओ ने कहा कि चीन की तरफ से पैदा किया जा रहा खतरा वास्तविक है.
उन्होंने कहा, ”इस दिशा में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी लंबे समय से प्रयास कर रही है. निश्चित तौर पर जमीन पर उनको रणनीतिक स्थिति का फायदा होता है. लेकिन, आप किसी भी समस्या को चिन्हित करें तो लंबे समय से उस दिशा में वे काम कर रहे हैं.”
पोम्पिओ ने कहा कि खतरा देखें तो भारत के साथ लगी सीमा पर जो हो रहा है उसके लिए वे लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा सेना को आगे करने के संबंध में उन्होंने कहा कि खतरा वास्तविक है.
उन्होंने कहा, ”चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अपनी सेना की क्षमता बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. हमारा रक्षा विभाग भी मानता है कि यह खतरा वास्तविक है.”
उन्होंने कहा कि आज की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी दस साल पहले की पार्टी से अलग है. पोम्पिओ ने कहा, ”सूची बहुत लंबी है, चाहे अमेरिका के बौद्धिक संपदा अधिकार को चुराने का मामला हो, अमेरिका में लाखों लोगों की नौकरी बर्बाद करने का मुद्दा हो, दक्षिण चीन सागर में समुद्री मार्ग में खतरा पैदा करने का हो, चीन ऐसे कई कदम उठा रहा है. साथ ही, जिन स्थानों पर सेना की तैनाती का अधिकार नहीं है वहां भी चीन उनकी तैनाती कर रहा है.”

