रांची: झारखंड का प्रतिष्ठित शैलप्रिया स्मृति सम्मान घोषणा के मुताबिक 12 दिसंबर शाम 5:00 बजे एक ऑनलाइन कार्यक्रम में जानी मानी कवयित्री और संस्कृतिकर्मी वंदना टेटे को प्रदान किया जा रहा है. इस आयोजन में मुख्य वक्ता के तौर पर गंगा सहाय मीणा शामिल होंगे, मुख्य अतिथि जानी-मानी आलोचक रोहिणी अग्रवाल होंगी और कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने-माने आलोचक वीर भारत तलवार करेंगे. ये जानकारियां शैलप्रिया स्मृति न्यास की ओर से विद्याभूषण ने दीं.
उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल होने की वजह से इस बार यह कार्यक्रम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण आदिवासी लिटरेचर के फेसबुक पन्ने या झारखंडी अखरा के यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है.
उन्होंने बताया कि वंदना टेटे झारखंड में पिछले कई वर्षों से सक्रिय एक रचनात्मक उपस्थिति हैं. वे बहुत अच्छी लेखक होने के अलावा संस्कृतिकर्मी, संपादक और संगठनकर्ता भी हैं. आदिवासी साहित्य और संस्कृति पर उनका काम विशेष तौर पर उल्लेखनीय है.
यह पांचवा शैलप्रिया सम्मान है. इसके पहले निर्मला पुतुल, नीलेश रघुवंशी, अनीता रश्मि और अनीता वर्मा इस पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं. रांची की जानी-मानी लेखिका शैल प्रिया का निधन 1994 में हो गया था. उनकी स्मृति में महिला लेखन को लेकर दिया जाने वाला यह सम्मान अपनी एक अलग पहचान रखता है. जब शैलप्रिया का पहला संग्रह ‘अपने लिए’ प्रकाशित हुआ तब अचानक कई लोगों को खयाल आया कि यह तो एक नई संवेदनशील अभिव्यक्ति है. इसके बाद उनका दूसरा कविता संग्रह ‘चांदनी आग है’ भी प्रकाशित हुआ. मगर 1994 में शैलप्रिया को कैंसर ने अपनी चपेट में ले लिया और अंततः 1 दिसंबर 1994 को वह उन्हें अपने साथ ले गया. तब उनकी उम्र सिर्फ 48 साल थी और वे अपने रचनात्मक क्षितिजों का विस्तार करने में लगी हुई थीं. एक बड़ी संभावना अचानक काल कवलित हो गई. उनके निधन के बाद वाणी प्रकाशन से उनका संग्रह घर की तलाश में यात्रा प्रकाशित हुआ. बाद के वर्षों में उनकी कुछ और कृतियां आईं और अंततः 2 साल पहले उनका संपूर्ण रचनात्मक अवदान अर्द्धवृत्त के नाम से सामने आया.

