सुरूर रज़ा,
रांची: लॉकडाउन में छूट मिलने के साथ ही लोग ऐसा समझ रहे हैं कि कोरोना खत्म हो गया है. जबकि सच्चाई यह है कि कोरोना के साथ ही अब लोगों को अपनी जिंदगी जीनी है. शहर से लेकर गांव तक, बाजार से लेकर हाट तक, हर जगह लोगों को बगैर मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग के आवाजाही करते हुए देखा जा रहा है. बाजारों में सामान्य दिनों की तरह भीड़ भी दिख रही है.
ऐसे में बाजार में बगैर मास्क के घूमना कोरोना को पास बुलाने जैसा है. प्रशासन निरंतर रूप से लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए आगाह कर रहा है, परंतु लोग किसी की नहीं सुन रहे.

ऑटो चालक भी कोरोना को लेकर सतर्क नजर नहीं आ रहे हैं, ना तो खुद ही मास्क पहनते हैं और न लोग जो ऑटो में बैठकर सफर करते हैं उन्हें मास्क पहनने के लिए कहते हैं. राज्य में कोरोना के मरीजोंं की संख्या भले ही कम हुई हो लेकिन, शहर में अब भी ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं. ऐसे में लापरवाही कहीं खतरा न बन जाये, इसका ख्याल रखना होगा.

हर जगह कोरोना के प्रति दिख रही बेफिक्री
न चेहरे पर मास्क, न ही शारीरिक दूरी का पालन. बाजार जाइए तो आपको हर जगह यह दिख जाएगा. चाय की दुकान हो या कपड़े की, सैलून हो या राशन की दुकान, कहीं भी शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो रहा. दुकान के आगे पहले रिबन या रस्सी बंधी मिलती थी, वो अब कम ही दुकानें में दिख रही. कोविड 19 के प्रति कैसी बेफिक्री है इसका नजारा देखना है तो चले आइए अलबर्ट एक्का चौक. यहां फुटपाथी दुकानदार सारे निर्देशों को धत्ता बताकर सामान बेच रहे हैं. न चेहरे पर मास्क और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे है.

देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस महामारी के सेकेंड फेज को लेकर झारखंड भी अलर्ट मोड में है. सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है.
वहीं कोरोना मामले को लेकर मुख्मंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सतर्कता और सामू्हिक प्रयास से यह जंग जीती जा सकती है. उन्होंने कहा कि लाकडाउन और कोरोना संकट काल में महामारी से हमने काफी हद तक सफलतापूर्वक जंग लड़ी.

झारखंड पूरे देश के लिए उदाहरण बना. सरकार झारखंड में जनजीवन सामान्य करने में जुटी हुई है. कोरोना के खिलाफ जंग को आमजनों के सहयोग से जीता जा सकता है. आमजनों से अनुरोध है कि जब तक इसका पुख्ता इलाज न हो, तबतक सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें.

