जितनारायण शर्मा,
गोड्डा: जिले के सदर प्रखंड के पनदाहा पंचायत की स्वयंसेवक नीलम देवी पर इन दिनों प्रधानमंत्री आवास में घूस लेने व फर्जी कागजात के सहारे नौकरी करने का आरोप लगाया जा रहा है.
यह आरोप ग्राम पंचायत पनदाहा के दूधिया पहाड़ी के ग्रामीणों ने लगाया है. मामले में वार्ड नंबर 9 के वार्ड सदस्य तजेश्वर साह और वार्ड आठ कपिल यादव ने आरोप लगाया है कि लाभुकों को प्रधानमंत्री आवास दिलाये जाने के नाम पर स्वयंसेवक नीलम देवी लाभुकों से घूस मांगती है.
इतना ही नहीं गांव की बेटी होने के कारण आखिर किस प्रकार स्वयंसेवक में उनकी बहाली हुई, इस पर भी उन्होंने सवाल उठाए? मामले में जब पूछताछ की गई तो दुधिया पहाड़ी गांव की मकिमन देवी ने बताया कि 2 दिन पूर्व आवास के नाम पर आयी राशि को नीलम देवी द्वारा सीएसपी सेंटर ले जाकर निकलवाया गया, जहां पैसा निकासी करने के बाद मुझसे ₹6000 रुपये ले लिया गया,ओर पहले ₹2000 रूपये, और कहा कि ऊपर से नीचे सभी पदाधिकारी को मैनेज करना पड़ता है इसीलिए यह राशि देनी पड़ेगी.
वहीं अन्य लाभुकों ने भी स्वयं सेवक पर घूस लेने का आरोप लगाया है. जबकि वार्ड कपिल यादव से मामले में पूछे जाने पर कि क्या नीलम देवी पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं सही है, के जवाब में कहा कि ग्रामीणों द्वारा लगाया गया आरोप बिल्कुल सही है.
उन्होंने यह भी कहा कि जब ग्रामीण इसका विरोध करते हैं तो उन पर हरिजन एक्ट के तहत केस करने की धमकी नीलम देवी द्वारा दी जाती है. आगे पूछे जाने पर बताया कि 2016 में स्वयं सेवक की बहाली हुई थी, पंदाहा पंचायत नीलम देवी का मायका है और उनकी शादी तकरीबन 9 से 10 वर्ष पूर्व बांका बिहार में ही हो चुकी है तो फिर किस हिसाब से उनकी बहाली स्वयंसेवक सेवक के रूप में हुई है, यह जांच का विषय है.
बता दें कि 2016 में स्वयंसेवक का चयन हुआ था, जिसमें पंचायत के ही लोग स्वयंसेवक के पद पर अपना आवेदन कर सकते थे. इतना ही नहीं उसी पंचायत का जाति और निवासी प्रमाण पत्र आवेदन कर्ता को देना था.
तो सवाल यह उठता है कि शादी हो जाने के बाद नीलम देवी का निवासी सदर प्रखंड कर पनदाहा पंचायत से आखिर कैसे बन गया. जबकि नियम यह है कि शादी के बाद लड़की का ससुराल है उसका स्थायी पता होता है और निवासी प्रमाण पत्र भी उसके ससुराल का ही मान्य होता है.
ऐसे में ग्रामीणों के द्वारा जो आरोप लगाए जा रहे हैं उसमें कहीं ना कहीं सच्चाई नजर आती है. यदि बहाली के समय पंचायत का ही निवासी देना सुनिश्चित किये जाने का रहा होगा तो फिर कैसे बांका की रहने वाली नीलम देवी की बहाली स्वयंसेवक के रूप में हुई है.
वहीं दूसरी तरफ घूस लेने के मामले में जब नीलम देवी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि,मैंने किसी से कोई राशि प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर नहीं ली है मेरे पर लगाए सारे आरोप निराधार हैं.

