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प्रशिक्षित शिक्षकों की बाट जोहती प्रतिबद्धताएं

by bnnbharat.com
November 8, 2019
in समाचार
प्रशिक्षित शिक्षकों की बाट जोहती प्रतिबद्धताएं

प्रशिक्षित शिक्षकों की बाट जोहती प्रतिबद्धताएं

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राहुल मेहता,

रांची: केंद्र सरकार के निर्देश पर झारखण्ड शिक्षा परियोजना ने राज्य के सभी चिन्हित 7578 अप्रशिक्षित शिक्षकों को निकालने का आदेश दे दिया है. प्रशिक्षित विशेष शिक्षक संघ के सदस्यों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए परियोजना एवं राज्य सरकार के जवाबदेही एवं जिम्मेदारियों के प्रति भी ध्यानाकर्षण किया है.

सरकार ने समावेशी शिक्षा को महत्वपूर्ण माना है, क्योंकि न केवल यह विविधता को महत्व देती है बल्कि एक समावेशी समाज के निर्माण में भी सहायक है. यही नहीं यह एक मूल अधिकार भी है. 

समावेशी शिक्षा सम्बन्धी भारत की प्रतिबद्धताएं–

•    समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करना और सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना, सतत विकास लक्ष्य 4.

•      शून्य अस्वीकृति नीति ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा प्रणाली से बाहर न रहे- सर्वशिक्षा अभियान

•     06-18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार- शिक्षा का अधिकार अधिनियम

•   सरकार द्वारा वित्तपोषित एवं मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थाओं में समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना एवं इसके लिए आवश्यक प्रावधान करना, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016

•  भारतीय पुनर्वास परिषद् से निबंधित एवं प्रशिक्षित शिक्षक ही पुनर्वास सेवा प्रदान कर सकते हैं (भारतीय पुनर्वास परिषद्).

•    सीबीएसई और सीआईएससीई दोनों से सहबद्ध विद्यालय में आठवीं कक्षा तक के बच्चों का  शून्य अस्वीकृति एवं विद्यालय में विशेष शिक्षक नहीं होने पर उनका सहबद्धता रद्द करने का प्रावधान (सीबीएसई और सीआईएससीई का निर्देश).

झारखण्ड  सरकार की प्रतिबद्धताएं:

·  प्राथमिक एवं उच्च विद्यालयों के पाठ्यक्रम में  दिव्यांगता सम्बन्धी पाठ्यक्रम शामिल करना एवं शिक्षकों का प्रशिक्षण.

·  अत्यधिक दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों के लिए गृह आधारित शिक्षा.

मुद्दा वाजिब है. अप्रशिक्षित शिक्षक नहीं होने चाहिए लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों की बहाली भी होनी चाहिए, अन्यथा प्रतिबद्धताएं पूरी होंगी कैसे? झारखण्ड शिक्षा परियोजना ने दिव्यांगता सम्बन्धी शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किया है पर इसके वेब साईट या गत वर्ष के वार्षिक प्रतिवेदन से समावेशी या समेकित शिक्षा वंचित ही है और समावेश की बाट  जोह रही है. बाट  तो प्रशिक्षण विशेष शिक्षक भी जोह रहें हैं, जिनके बिना प्रतिबद्धताओं की पूर्णता संभव नहीं. प्रतिबद्धताएं पूरी तभी होंगी जब इसके लिए प्रयास किये जायेंगे. अभी तो विशेष प्रयास का ही इंतजार है.

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