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ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, मांगा स्कूल व बस फीस माफ कराए साथ ही बच्चों को बुक उपलब्ध कराए

कोई भी बड़ी घटना ना घटे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है.

by bnnbharat.com
April 21, 2020
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ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, मांगा स्कूल व बस फीस माफ कराए साथ ही बच्चों को बुक उपलब्ध कराए

ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, मांगा स्कूल व बस फीस माफ कराए साथ ही बच्चों को बुक उपलब्ध कराए

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रांची: ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन झारखंड के अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को एक पत्र के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि राज्य के लाखो बच्चों का लॉक डाउन के दौरान पठन-पाठन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले 21 मार्च से विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस को लेकर राज्य सरकार की ओर से लॉक डाउन लगाया गया था और 25 मार्च से केंद्र सरकार ने भी पूरे देश में लॉक डाउन लगा दिया है जो वर्तमान में भी जारी है , राज्य में  लॉक डाउन का एक महीना हो चुका है.

राज्य के  विभिन्न जिलों के अभिभावकों के द्वारा लगातार गुहार लगाई जा रही है की कैसे वो अपने घर को चलाएं, बच्चों का फीस कैसे भरें, यह बहुत बड़ा मानवीय और सोचनीय प्रश्न खड़ा हो गया है. संकट की इस घड़ी में आर्थिक स्थिति से जूझ रहे अभिभावकों को राहत देने के लिए कई जिलों के उपायुक्तों ने स्कूल, बस फीस माफ करने के लिए अलग अलग आदेश स्कूलों को दिए है. रांची राजधानी सहित राज्य के ज्यादातर उपायुक्तों ने इसे जरूरी नही समझा या वो निजी स्कूलों के दबाव में नहीं दे रहे हैं, यह जांच का विषय है.  जिसका फायदा रांची जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों के कई स्कूल अभिभावकों से क्वार्टरली फीस वसूलने में सफल रहे. इन गंभीर मामलों पर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को कड़े निर्णय लेने की जरूरत है.

अजय राय ने कहा कि लॉकडाउन होने के कारण राज्य के सभी सरकारी गैर सरकारी स्कूल बंद है । इन परिस्थितियों में अपने को हर लोग घरों में सिमटे हुए रख रहे है. वर्तमान में राज्य के कुछ जिलों में कुछ स्कूलों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है, जो कहीं से सफल होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है. इसमें किसी घर में  दो – तीन बच्चे हैं  और एंड्राइड मोबाईल फोन उन परिस्थितियों में एक साथ ऑनलाइन पढ़ाई होने से सारे बच्चों तक यह सुविधा नहीं मिल पा रही है. वहीं एंड्राइड मोबाइल के कारण कई गलत साइट खोलने का भी बच्चे शिकार हो रहे हैं.

इन सारी परिस्थितियों में बच्चों के ऊपर पठन-पाठन के लिए किताब कॉपी नहीं होने से घर में रहते हुए भी पढ़ाया नहीं जा पा रहा है. चुकी 20-21 का नया सत्र शुरू हो गया है. घर में नए सत्र का किताब कॉपी लॉक डाउन के कारण नही लिए जाने से बच्चे घर पर पढ़ नहीं पा रहे हैं. ऐसे समय में घर के अभिभावक घर में रहते हुए भी किताब कॉपी नही रहने के कारण बच्चों को पढ़ा नही पा रहे है. परंतु कोरोना वायरस के कारण जो वर्तमान हालात हैं. इन हालातों में अगले 3 मई तक लॉक डाउन की अवधि के बावजूद सामान्य रूप से खोलने को लेकर समय ज्यादा लगेगा. क्योंकि राज्य सरकार को इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि रांची राजधानी सहित जो भी शहरी क्षेत्र कोरोना संक्रमित रहे है और जहां से काफी सख्या में लोग कोरोना पोजेटिव मिले है. उन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चे जिले के लगभग सभी स्कूलों में कोई न कोई पढ़ने के लिए जाते है.   ऐसे में उन क्षेत्रों के किसी बच्चे का संक्रमण की बात सामने आती है तो उसका असर पूरे स्कूल के बच्चों पर पड़ेगा. इन बातों को भी गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत होगी और स्कूल खोलने से पहले पूरे स्कूलों का सैनिटाइजेशन, बसों का सैनिटाइजेशन, प्राइवेट स्कूल, वैन ऑटो इन सभी पर नजर रखनी होगी और उनको सैनिटाइज कराना होगा नहीं तो कोई भी बड़ी घटना ना घटे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है.

ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन इन वर्तमान परिस्थितियों में राज्य के माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह करना चाहती है कि राज्य के सभी जिलों के स्कूलों के लिए लॉकडाउन अवधि की फीस माफ करने को लेकर एक आदेश निकाले जो सभी जिलों के लिए प्रभावी हो साथ ही सभी जिलों के उपायुक्तों के देख रेख में सरकारी गैर सरकारी स्कूलों के प्रबंधकों/प्राचार्यों के साथ जिला के नोडल पदाधिकारी, किताब दुकानों से जुड़े हुए प्रतिनिधि की बैठक आहूत करवाये ताकि किताबों की होम डिलीवरी या स्कूल कैंपस के अंदर जिला प्रशासन की देखरेख में रोस्टर वाइज अभिभावकों को बुलाकर किताब, उपलब्ध कराई जा सके. चुकी स्कूल प्रबंधन जिनके पास बच्चों के माता पिता के मोबाइल, टेलीफोन नंबर उपलब्ध होने के साथ साथ सभी बच्चों के अभिभावकों के नाम एड्रेस भी स्कूल रजिस्टर में मौजूद हैं.

राज्य के लाखों बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अति शीघ्र कदम उठाएं ताकि कोरोना की विश्वव्यापी महामारी के बीच बच्चों का भविष्य कुछ हद तक

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