नई दिल्ली: चीनी वायरस कोरोना से भारत समेत दुनियाभर के 200 से ज्यादा देशों में हाहाकार मचा है. दुनियाभर में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामलों का आंकड़ा 3 करोड़ 64 लाख के पार पहुंच गया है. जबकि मृतकों की संख्या भी 10 लाख 60 हजार से ज्यादा हो गया है. राहत की बात ये है कि अबतक 2 करोड़ 53 लाख से ज्यादा लोग कोरोना वायरस को मात देकर ठीक हो चुके हैं. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में अमेरिका पहले और भारत दूसरे नंबर पर है. जबकि ब्राजील तीसरे और रूस चौथे नंबर पर है.
दुनियाभर में कोरोना से लड़ने की दवाई और वैक्सीन पर रिसर्च चल रहा है, लेकिन कोविड 19 के खिलाफ अबतक कोई कारगर वैक्सीन नहीं आ पाई है. हालांकि अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और भारत समेत कई देश कोरोना वैक्सीन बनाने के बेहद करीब है, सबकुछ ठीक रहा तो अगले एक-दो महीने में कोरोना वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगा. लेकिन इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है. WHO के संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (Unicef) और उनके सहयोगी संगठनों ने चेतावनी जारी किया है कि कोरोना महामारी से गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ के लिए ख़तरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है.
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी बढ़ी तो हर 16 सेकेंड में एक मृत बच्चा पैदा होगा और हर साल 20 लाख से भी ज्यादा ‘स्टिलबर्थ’ के केस सामने आएंगे. रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से ज्यादातर मामले विकासशील देशों से जुड़े होंगे. WHO की ओर से गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल करीब 20 लाख शिशु मृत पैदा (स्टिलबर्थ) होते हैं और ये मामले ज्यादातर विकासशील देशों से जुड़े हैं.
आपको बता दें कि गर्भाधान के 28 हफ्ते या उसके बाद मृत शिशु के पैदा होने अथवा प्रसव के दौरान शिशु की मौत हो जाने को ‘स्टिलबर्थ’ कहते हैं. संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि पिछले वर्ष उप-सहारा अफ्रीका अथवा दक्षिण एशिया में चार जन्म में से तीन ‘स्टिलबर्थ’ थे.
यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हैनरिटा फोर का कहना है कि हर 16 सेकेंड में कहीं कोई मां ‘स्टिलबर्थ’ की पीड़ा झेलेगी. उन्होंने कहा की बेहतर निगरानी, प्रसव पूर्व अच्छी देखभाल और सुरक्षित प्रसव के लिए पेशेवर चिकित्सक की सहायता से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है.

