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कम लागत में जलसंरक्षण : बेहतर विकल्प

by bnnbharat.com
July 28, 2019
in Uncategorized
कम लागत में जलसंरक्षण : बेहतर विकल्प
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रिपोर्टर – ज्योत्सना

केंद्र और राज्य सरकार का जल शक्ति अभियान सभी जिलों और प्रखंडों में तेजी से बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है. कहीं बड़े बड़े तालाब खोदे जा रहे है,कहीं डोभा तो कहीं खेतों में ट्रेंच खुदाई से जल संरक्षण के अभियान को अमलीजामा पहनाया जा रहा है. हजारों- लाखों की लागत से जल संचयन के उपाय किए जा रहे हैं.

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लेकिन खूंटी जिले के सुदूरवर्ती नक्सलप्रभावित अड़की थाना क्षेत्र के इलाकों में सीआरपीएफ की 157 बटालियन ने मामूली से बजट में जल संचयन का नायाब तरीका निकाला है. इसके लिए सबसे पहले प्लास्टिक के 500 या हजार- दो हजार लीटर वाले ड्रम लेकर उसमें ड्रिल मशीन से कई जगह छेद कर दिया गया. उसके पश्चात छत से गिरने वाली बारिश के पानी को पाइप के सहारे ड्रम में जमा करने की जुगाड़ लगाई गई. आवश्यकतानुसार 4 फीट या 6 फीट के गड्ढे बनाकर चारों तरफ पत्थर और ईंट के टुकड़ों से प्लास्टिक के ड्रम को बाहर से भर दिया गया ताकि ड्रम में मिट्टी न भरे. पत्थर और ईंट के टुकड़ों से पानी रिसकर वाटर लेवल को मेंटेन रखेगा. साथ ही ड्रम के पानी को गाड़ी धोने, कपड़े धोने और बाहरी काम काज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

बारिश के बाद लगातार 7-8 दिनों तक जमीन में गाड़े गए ड्रम में पानी संरक्षित रहता है. वाटर लेवल को बेहतर बनाने के लिए कम पूंजी और कम श्रम शक्ति लगाकर ड्रम के सहारे बेहतर जल संचयन किया जा सकता है.

सीआरपीएफ की 157 बटालियन ने बताया कि अड़की क्षेत्र के कई स्कूलों में इसे धरातल पर उतारने की योजना है. सीआरपीएफ के जमशेदपुर मुख्यालय में इस तरह के 8 ड्रम के सहारे जल संचयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. सीआरपीएफ की 157 बटालियन ने इसे मिशन मोड में नक्सली इलाकों में पूरा करने का बीड़ा उठाया है. जन शक्ति बनाम जल शक्ति के रूप में अड़की क्षेत्र के स्कूलों और पंचायत सचिवालयों में ड्रम के सहारे पानी की किल्लत दूर की जाएगी.

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