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कमजोर ट्रेनिंग और बीमा कंपनी की चेतावनी, यात्री जहाज एमएस स्कैंडिनेवियन स्टार ने सभी को हल्के में लिया, आग लगी तो मारे गए 159 लोग

by bnnbharat.com
April 7, 2021
in समाचार
कमजोर ट्रेनिंग और बीमा कंपनी की चेतावनी, यात्री जहाज एमएस स्कैंडिनेवियन स्टार ने सभी को हल्के में लिया, आग लगी तो मारे गए 159 लोग
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बीएनएन डेस्क : यात्री जहाज ‘एमएस स्कैंडिनेवियन स्टार’ का असली नाम एमएस मासालिया था. इसका निर्माण 1971 में फ्रांस में किया गया था. 7 अप्रैल 1990 की रात जहाज में आग लग गई और 159 लोगों की मौत हो गई. आधिकारिक जांच में दोषी पाए गए व्यक्ति की मौत भी इसी आग में हो गई थी, जिसके बाद से ये जांच विवादों में बनी हुई है.

1990 में स्कैंडिनेवियन स्टार को Vognmandsruten को बेच दिया गया और ओस्लो, नॉर्वे और फ्रेडरिकशवन, डेनमार्क के बीच DA-NO लिनजेन के मार्ग पर सेवा के लिए डाल दिया गया. चूंकि एक कैसिनो जहाज से यात्री जहाज में बदल दिया गया था, इसलिए एक नए चालक दल को ट्रेनिंग दी जानी थी और उन्हें नई जिम्मेदारियों को सीखने के लिए सिर्फ दस दिन का समय दिया गया जबकि नेशनल ज्योग्राफिक चैनल की डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ सेकंड्स ऑफ डिजास्टर के लिए इंटरव्यू के दौरान मास्टर मरीनर कैप्टन एम्मा टिलर मुताबिक स्टार साइज के जहाज के लिए एक चालक दल को ट्रेंनिग में छह से आठ हफ्तों का समय लगता है.

बीमा कंपनी ने दी थी चेतावनी

डॉक्यूमेंट्री में यह समझाया गया कि चालक दल के कई लोग अंग्रेजी, नॉर्वेजियन या डेनिश भाषा नहीं बोल सकते थे. इससे आपात स्थिति में उनकी प्रतिक्रिया पर असर पड़ सकता था. बीमा कंपनी Skuld के तकनीकी नेता एरिक स्टीन ने कुछ ही समय पहले जहाज का निरीक्षण किया था और कई कारणों से आग की तैयारी में कमी की घोषणा की थी.

7 अप्रैल 1990 की रात स्थानीय समयानुसार रात करीब 2 बजे जहाज पर आग लग गई. एक यात्री ने इसे देखा और रिसेप्शनिस्ट को इस बारे में बताया. आग लगातार फैलती जा रही थी. आग फैलने के लिए सीढ़ी और छत ने चिमनी के रूप में काम किया. डेक 3 से शुरू हुई आग डेक 4 और 5 तक फैल गई.

ट्रेनिंग की कमी से भटक गए यात्री

जब कप्तान को आग के बारे में पता चला तो उसने डेक 3 पर बल्कहेड फायर डोर को बंद करने की कोशिश की. कप्तान ने अपने चालक दल को वेंटिलेशन सिस्टम को बंद करने का आदेश दिया जब यह महसूस किया कि यह आग को बढ़ा रहा था. डोर वेंट्स के माध्यम से धुआं यात्रियों के केबिन में जा रहा था.

कई यात्रियों ने धुएं से बचने के लिए बाथरूम में छिपने की कोशिश की. जिन लोगों ने भागने की कोशिश की वो ट्रेनिंग की कमी के चलते चालक दल के निर्देशों से भ्रमित हो गए. जांचकर्ताओं ने कई कारण दिए कि क्यों कई यात्रियों को सुरक्षित रूप से बचाया नहीं जा सका.

लोगों की मौत के कई कारण

जांचकर्ताओं ने बताया कि कई लोगों ने शायद अपने केबिन और अलार्म के बीच की दूरी के कारण अलार्म नहीं सुना था. कुछ लोग धुएं के चलते शायद रास्ता भटक गए होंगे. हॉलवे में मेलामाइन पैनलों के जलने से जहरीली हाइड्रोजन साइनाइड और कार्बन मोनोऑक्साइड पैदा हुई, जिससे तेजी से बेहोशी और मौत हो गई. कई पुर्तगाली क्रू मेंबर्स नार्वे, डेनिश या अंग्रेजी को न बोलते थे और न समझते थे, वो जहाज से अपरिचित थे और उन्होंने कभी भी फायर ड्रिल का अभ्यास नहीं किया था.

10 घंटे में बुझी आग और 159 मर गए

चालक दल के कुछ ही सदस्यों ने धुएं से भरे गलियारे में घुसने से पहले मास्क लगाया. कैप्टन ने जनरल अलार्म को ऑन कर दिया और सभी से जहाज छोड़ने के लिए कहा. जहाज को स्वीडन के लिसेकिल ले जाया गया, जहां दमकल विभाग ने दस घंटे में आग पर काबू पा लिया.

कैप्टन ने कहा कि जहाज पर 395 यात्री और 97 चालक दल सवार थे. बाद में पता चला कि 158 यात्रियों या जहाज पर सवार एक-तिहाई लोगों की मौत हो गई. एक अन्य बुरी तरह घायल यात्री ने दो हफ्ते बाद दम तोड़ दिया. मारे गए लोगों में से 136 नॉर्वे के थे.

 

 

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