रांची: आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला ने कहा है कि कोरोना प्रकोप से देश की अर्थव्यवस्था में जिस आकार-प्रकार के नुकसान की आशंका विशेषज्ञों और जानकारों ने जतायी है. उसी अनुपात में केंद्र सरकार को वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज देना चाहिए, ताकि आजीविका, उद्यम-व्यापार और वित्तीय सेक्टर की मजबूती सुनिश्चित कर अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जा सके.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की जीडीपी में जीरो वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, तो नोमुरा होल्डिंग्स ने चालू वित्त वर्ष में निगेटिव ग्रोथ की आकलन किया है.
सरकार के थिंक टैंक समझे जाने वाली संस्था नीति आयोग ने भी जीडीपी में 2 से 3 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है. लॉकडाउन के कारण जीडीपी में गिरावट के जो आंकड़े आ रहे है. उससे नीति निर्माताओं के सामने राहत पैकेज का आकार तय करने की चुनौती बढ़ती जा रही है.
उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देशों ने कोविड से निपटने के लिए फिस्कल प्रोत्साहन दिया है, अमेरिका अपनी जीडीपी का 10 प्रतिशत, जर्मनी और ब्रिटेन ने 20 प्रतिशत से ज्यादा, चीन ने 9 प्रतिशत, सिंगापुर ने 15प्रतिशत, मलेशिया ने 18 प्रतिशत की धनराश प्रोत्साहन के रूप में दी है.
जबकि नीति आयोग ने इस संदर्भ में सरकार को जो सुझाव दिया है. वह 10 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी के 5 प्रतिशत के बराकर राशि का रिलीफ पैकेज का है.
नीति आयोग की परिकल्पना में गरीबों को इनकम सपोर्ट, कॉर्पारेट को इक्विटी समर्थन, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग क्षेत्र में एनजीए के एक हिस्से का अवशोषण और हेल्थ सेक्टर में ज्यादा से ज्यादा निवेश की बात है, जबकि द इकोनॉमिक टाइम्स का आकलन जीडीपी के 8 से 9 प्रतिशत आकार के प्रोत्साहन पैकेज की उम्मीद कर रहा है.
उन्होंने कहा कि नकारात्मक ग्रोथ से जो सामाजिक आर्थिक स्थिति उत्पन्न होगी, वह बहुत भयावह होगी. सरकार को इस स्थिति से हर कीमत पर बचना है. फिस्कल डेफिसिट के बढ़ने और क्रेडिट रेटिंग के घटने से चिंता किये बगैर सरकार को समुचित वित्तीय प्रोत्साहन की घोषण जल्द से जल्द करनी चाहिए.

