नई दिल्लीः व्हाट्सएप सोशल मीडिया पर संचार का एक ऐसा एप हैं, जिसके यूजर्स करीब 230 करोड़ हैं. व्हाट्सएप भी लोकप्रियता को देख यूजर्स के लिए आए दिन नए-नए फीचर्स की लॉन्चिंग करता रहता है, लेकिन एप की नई प्राइवेसी पॉलिसी ने लोगों को असमंजस में डाल दिया है. यूजर्स के मन में व्हाट्सएप को लेकर नए-नए सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसका दावा एक सर्वे रिपोर्ट में भी किया गया है.
साइबर मीडिया रिसर्च के एक सर्वे के मुताबिक 28 प्रतिशत यूजर अब व्हाट्सएप का इस्तेमाल बंद करने के बारे में सोच रहे हैं. वहीं, 79 प्रतिशत यूजर ऐसे हैं जो अभी यह डिसाइड नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें व्हाट्सएप का इस्तेमाल जारी रखना है या बंद करना है. व्हाट्सएप अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी को 8 फरवरी 2021 से लागू करने वाला था, लेकिन फिलहाल इसे कुछ महीनों के लिए टाल दिया गया है.
यूजर्स से मिले निगेटिव रिस्पॉन्स के कारण कंपनी को इसे मई 2021 तक के लिए टालना पड़ा है. कंपनी चाहती है कि इस दौरान यूजर व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को अच्छे से पढ़ और समझ सकें. नई पॉलिसी को लागू करने की तारीख को आगे बढ़ाने का फैसला काफी हद तक कंपनी के पक्ष में रहा है. ऐसा न होने पर वॉट्सऐप के एक्टिव यूजर्स की संख्या में भारी कमी आ सकती थी.
बता दें कि व्हाट्सएप की नई पॉलिसी से यूजर्स में कंपनी को लेकर कई तरह की सोच पैदा हो गई है. 49 प्रतिशत यूजर्स इससे काफी नाराज हैं और 45 प्रतिशत यूजर्स ने व्हाट्सएप पर कभी भरोसा न करने की बात कही है. वहीं, व्हाट्सएप यूज करने वाले 35 प्रतिशत यूजर्स ने इसे ब्रीच ऑफ ट्रस्ट यानी भरोसे का तोड़ा जाना करार दिया है.
वहीं, साइबर मीडिया की रिसर्च में कहा गया है कि व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर के ज्यादातर यूजर्स थर्ड पार्टी सर्वर पर स्टोर की जा रही चैट्स को लेकर चिंतित रहते हैं. रिसर्च फर्म के अनुसार व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर के 50 प्रतिशत से ज्यादा यूजर्स को लगभग हर दिन स्पैम मेसेज मिलते हैं. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किय गया है कि सर्वे में हिस्सा लेने वाले यूजर्स में 50 प्रतिशत ऐसे थे जिन्हें अनजान नंबर से संदिग्ध मेसेज मिले थे जिनमें फिशिंग अटैक और वायरस वाले लिंक थे.

