सुरूर रज़ा,
रांची: ‘अंकल ये पार्क कब खुलेगा? हमारे घर के आगे मैदान भी नहीं है. हम न खेल पा रहे हैं न ही झूले झूल पा रहे है….’ हेमंत अंकल को बोलिये ना, जल्दी से पार्क खोल दें. घर में रह-रह कर परेशान हो रहे हैं. ये एक बच्चे की भावना है जो पार्क में केयर टेकर से पूछ रहा है. ये केवल एक बच्चे की बात नहीं है, हर घर की कहानी है. पार्क नहीं खुलने से बच्चे परेशान हैं.
झूले हो रहे हैं खराब:
राजधानी के पार्क काफी दिनों से बंद पड़े है और अब पार्कों के खुलने का इंतजार बच्चों के साथ-साथ बड़े भी बेसब्री से करने लगे हैं, परंतु पार्कों के खोलने का आदेश अबतक सरकार द्वारा नहीं मिला है और अब कुछ दिनों में नया साल आने वाला है और इसमें लोग पिकनिक मनाने पार्क की ओर कूच करते हैं,परंतु इस साल कोरोना की वजह से पार्क वीरान पड़ा है, जिसकी वजह से पार्कों की स्थिति भी जर्जर होती जा रही है.
पार्क काफी महीनों से बन्द पड़े हैं जिसकी वजह से पार्क के फाउंटेन भी खराब हो चले हैं. पार्क के रख-रखाव ना होने की वजह से चेयर और झूले भी खराब हो रहे हैं.
नशेड़ियों का लगता है जमावड़ा:
कोरोना काल में महीनों से पार्क बंद हैं. पार्क बंद होने से उसकी देखरेख भी नहीं हो रही है. पार्क में जगह -जगह घास उग आये हैं. पार्क में अब नशेड़ियों का भी जमावड़ा लगने लगा है.
क्या कहते है पार्क के कर्मचारी:
पार्क के कर्मचारियों ने कहा कि जिस तरह मॉल ,जिम को खोला गया है. पार्कों को भी जल्दी खोलना चाहिए क्योंकि लंबे समय से पार्क बंद हैं जिसकी वजह से पार्कों का ठीक से रख रखाव नही हो रहा है.
कर्मचारियों का कहना है कि अक्सर आते-जाते कॉलेज के बच्चे और लोग हमेशा हमसे पूछते हैं कि आखिर यह पार्क कब खुलेगा. हमारी सरकार से यही विनती है कि अब पार को खोल देना चाहिए क्योंकि नए साल का आगमन होने वाला है और नए साल में लोग अपने परिवार के साथ पार्क आना पसंद करते हैं.

