पाकिस्तान : कोरोना के कहर के बावजूद पाकिस्तान (Protest in Pakistan) में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. राजधानी इस्लामाबाद समेत कई शहरों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई. यहां तक कि पुलिसवालों को भी दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया. आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? वो शख्स कौन है जिसकी गिरफ्तारी से लोगों का गुस्सा इस कदर फूट गया कि वो हथियार लेकर सड़कों पर उतर आए? वो शख्स जिसके एक इशारे पर पाकिस्तान की पूरी कानून व्यवस्था ही चरमरा गई. प्रधानमंत्री इमरान खान भी जिसके आगे अक्सर बेबस दिखते हैं. उस शख्स का नाम है साद रिजवी .
तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) पाकिस्तान का नया चीफ और पाक के कट्टरपंथी और प्रभावशाली नेता खादिम रिजवी का बेटा. खादिम रिजवी का पिछले साल नवंबर में निधन हो गया, जिसके बाद उनके बेटे ने संगठन की जिम्मेदारी संभाली. साद रिजवी को पुलिस ने उनके घर पर छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद उनके समर्थकों ने पूरे पाकिस्तान में ही आग लगा डाली.
साद रिजवी को क्यों किया गिरफ्तार
फ्रांसीसी मैगजीन शार्ली हेब्दो में छपे पैगंबर मुहम्मद के विवादित कार्टून को लेकर साद रिजवी का संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है. इनकी मांग है कि फ्रांस के राजदूत को देश से निकाल दिया जाए. पिछले साल साद रिजवी के पिता खादिम रिजवी के नेतृत्व में पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हुए थे. फरवरी में इमरान खान सरकार ने भरोसा भी जताया कि राजदूत को देश से भेज दिया जाएगा. मगर इस पर अमल नहीं हुआ. साद रिजवी ने धमकी दी थी कि अगर सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया, तो फिर से प्रदर्शन होंगे. इसी वजह से उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
कट्टरपंथी खादिम रिजवी के हजारों समर्थक
खादिम रिजवी पाकिस्तान के अन्य कट्टरपंथी नेताओं की तरह ही थे. मगर TLP कभी किसी आतंकी गतिविधियों में शामिल नहीं पाया गया. माना जा रहा था कि पिछले साल नवंबर में प्रदर्शन में भाग लेने की वजह से वह कोरोना की चपेट में आए. इस वजह से उनकी मौत हो गई. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी.
2011 में एक घटना से आया चर्चा में
साल 2011 तक खादिम रिजवी कोई जानता तक नहीं था. मगर पंजाब प्रांत के गर्वनर सलमान तासीर की हत्या के बाद अचानक से वह सुर्खियों में आ गए थे. तासीर को उनके बॉडीगार्ड ने ही मार डाला था. तब वह तासीर के हत्यारे मुमताज कादरी के समर्थन में खड़ा हो गया था. उसने दावा किया था कि तासीर को मारा जाना इसलिए जरूरी था क्योंकि उसने ईशनिंदा करने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी का समर्थन किया था.
ईशनिंदा के खिलाफ कट्टर रुख
अपने पिता की तरह ही साद रिजवी का भी ईशनिंदा को लेकर कट्टर रुख है. यह संगठन ईशनिंदा कानून में बदलाव भी नहीं होने दे रहा है और अक्सर सरकारों पर दबाव बनाने में कामयाब हो जाता है. फरवरी, 2016 में जब मुमताज कादरी को फांसी पर चढ़ा दिया गया तो खादिम रिजवी के नेतृत्व में इस्लामाबाद में हिंसक प्रदर्शन हुआ था, जिसमें तीन लोग भी मारे गए थे.

