रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रदेश अध्यक्ष सह वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव के नेतृत्व में गठबंधन सरकार एक वर्ष पूरा करने जा रही है. एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में जहां सरकार की ओर से उपलब्धियों और कार्यों को लेकर रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाएगा, वहीं पार्टी की ओर से इन उपलब्धियों तथा कार्यां को जन-जन तक ले जाने के लिए व्यापक योजना बनायी गयी है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार के शासनकाल में एक व्यक्ति के द्वारा ही सारे निर्णय लिये जाते थे और उसे जनता पर थोप दिया जाता था, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार में सभी निर्णय सामूहिकता से लिये जाते है और कई बार यह देखने को भी विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के सुझाव पर भी सरकार ने अपने फैसले में संशोधन किया है, इसका ज्वलंत उदाहरण हाल में तब देखने को मिला, जब छठ महापर्व को लेकर जारी गाइडलाइन में सरकार द्वारा आवश्यक संशोधन किया गया. जबकि पिछली सरकार में सभी निर्णय एक तानाशाह शासक के रूप में लिये जाते थे, जिसका जनता ने भी कई बार खुलकर सड़कों पर विरोध किया, भूमि अधिग्रहण और सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ पूरे राज्य में जबर्दस्त आंदोलन हुआ और सरकार को अपना निर्णय वापस लेने के लिए विवश होना पड़ा.
प्रदेश प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने बताया कि कल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव तथा विधायक दल के नेता आलमगीर आलम की उपस्थिति में हुई यूपीए विधायकों की बैठक में न सिर्फ विभिन्न सदस्यों के उनके क्षेत्र से संबंधित जनसमस्याओं को सुना गया, बल्कि विकास योजनाओं को भी गति देने पर विस्तृत चर्चा हुई. यही कारण है कि यूपीए के सभी विधायक मुख्यमंत्री और मंत्रियों के समक्ष अपनी बातों को बेबाकी से रख पाते है और उनके क्षेत्र की समस्याओं का त्वरित समाधान भी होता है.
प्रदेश प्रवक्ता राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि कोरोना संक्रमणकाल में जिस तरह से राज्य सरकार ने हर जरुरतमंद परिवारों तक अनाज और मनरेगा के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का काम किया, उसकी देशभर में सराहना हुई. चाहे वह प्रवासी श्रमिकों को हवाई जहाज से वापस लाने का मामला हो या पैदल वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए हाईवे पर अथवा पुलिस थाने में भोजन की व्यवस्था हो, पूरे देश में गठबंधन सरकार की सराहना हुई.
दूसरी तरफ इस दौरान केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि समय पर उपलब्ध नहीं करा पाने में असमर्थता जाहिर की और सरकार को ऋण लेना पड़ा. वहीं नियमों का हवाला देखते हुए डीवीसी के बिजली बकाया के एवज में राज्य सरकार के खाते से 1417 करोड़ रुपये की निकासी कर ली गयी, इसके बावजूद सरकार ने अपने संसाधनों की बदौलत समाज के हर वर्ग पर समुचित ध्यान देने का प्रयास किया.

