कांग्रेस आलाकमान के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे कृषि मंत्री बादल
रांची: कांग्रेस आलाकमान के बुलावे पर मंगलवार को कृषिमंत्री बादल मंगलवार को दिल्ली पहुंचे. दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कृषिमंत्री ने बताया कि इस दौरे के क्रम में वे केंद्रीय नेतृत्व को गठबध्ांन सरकार में विभाग की उपलब्धियों के बारे में बताएंगे और आगामी बजट को लेकर मार्गनिर्देशन प्राप्त करेंगे.
कृषिमंत्री बादल ने किसान आंदोलन पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि दो महीने से दिल्ली के सिंधु बॉर्डन पर किसान आंदोलन रह है, वे किसी पार्टी से संबंधित नहीं है, जिन 60 लोगों की जान गयी है,वे भी किसी पार्टी के नहीं है, वे सिर्फ आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ाई लड़ रहे है, सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने की कोशिश कर रहे है, लेकिन हद तो तब हो गयी जब उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा.
दूसरी तरफ केंद्र में बैठे सत्तापक्ष के शीर्षस्थ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि यह आंदोलन सिर्फ पंजाब-हरियाणा में हो रहा है, जबकि सच्चाई है कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार समेत विभिन्न राज्यों का दौरा करने के दौरान उन्होंने यह देखा कि सभी राज्यों में किसान इस काले कानून के खिलाफ आंदोलनरत है.
पिछले दिनों वे बिहार गये थे, वहां आरजेडी के तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लाखों किसानों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया, झारखंड में भी गोड्डा से देवघर तक ट्रैक्टर रैली निकाल कर निकाली गयी. इसलिए इस आंदोलन को कुछ हिस्से का आंदोलन बताने वाले भाजपा नेताओं को यह बताना चाहिए कि देशभर में किसानों का प्रदर्शन क्यों हो रहा है, एनडीए में दशकों तक सहयोगी दल के रूप में शामिल अकाली दल ने क्यों उनका साथ छोड़ा, हकीकत यह है कि इस काले कानून के खिलाफ पूरे देश में आग लगी है.
बादल ने कहा कि कृषि राज्यों का विषय है, इस पर राज्यों की विधानसभा में चर्चा करानी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार ने जानबूझ कर कोरोनाकाल में उस वक्त आनन-फानन में बिना बहस के इन काले कानूनों को पारित कराया, जब संक्रमण के कारण पूरे देश की स्थिति सामान्य नहीं थी.केंद्र सरकार इस मसले पर बहस से भागना चाहती है.
उन्होंने कहा कि इस तुगलगी फरान के खिलाफ कांग्रेस पार्टी पूरे देश में यह बताने का काम कर रही है कि विपक्ष कहीं कमजोर नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान जो षड़यंत्र हुआ, उसकी भी न्यायिक जांच होनी चाहिए, ताकि सारे मामलों का पर्दाफाश हो सके.
बादल ने कहा कि आगामी दिनों में झारखंड विधानसभा में आम बजट पेश होना है, इसके अलावा झारखंड की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले है, दोनों राज्यों की राजनीति और संस्कृति काफी मिलती जुलती है, इसे लेकर पूर्व में ही कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम को जिम्मेवारी दी गयी है. उन्हें भी जिम्मेवारी मिलेगी, तो वे पार्टी आलाकमान के हर आदेश का पालन करेंगे. इसके अलावा एक साल में गठबंधन सरकार ने अपने वायदे को कितना पूरा किया, इसकी जानकारी भी केंद्रीय नेतृत्व को दिया जाएगा.

