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डायन कुप्रथाः एक आत्मावालोकन

by bnnbharat.com
November 13, 2019
in समाचार
डायन कुप्रथाः एक आत्मावालोकन

डायन कुप्रथाः एक आत्मावालोकन

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राहुल मेहता,

रांची: सात माह में 19 हत्या. आधुनिक युग में भी डायन के नाम पर बर्बर हत्या क्यों? ‘डायन‘ मात्र
अंधविश्वास से जुड़ा हुआ, आवेष में आकर किया गया अपराध नहीं है अपितु यह एक लम्बी एवं
संगठित अपराध है. महिलाओं के विरुद्ध, उसके स्वाभिमान एवं विकास के विरुद्ध.

कानूनी प्रावधान-

झारखण्ड सरकार ने डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम को अंगीकृत किया. इस अधिनियम के तहत किसी को डायन कहना, किसी को डायन के रूप में आरोपित करना, उसे प्रताड़ित करना, आर्थिक क्षति
पहुंचाना, उसके गरीमा को ठेस पहुंचाना आदि अपराध है एवं इसके लिए सजा का प्रावधान है.

कानूनी प्रक्रिया-

न्याय सबूत के आधार पर मिलता है. इस संगठित अपराध में एक ओर निरीह परिवार होता है तो
दूसरी ओर संगठित पूरा गांव. जिस घटना की सूचना कोई प्रशासन को नहीं देता तो गवाह मिलेगा
कहां से? फिर लक्षित परिवार के जीवित सदस्यों को रहना तो उसी गांव में है. डर एवं
परिस्थितिवष वे भी लम्बी व जटिल कानूनी प्रक्रिया के आगे हथियार डाल देते हैं. नतीजन अधिकतर
मामलों मे सजा नहीं होती है. कानून में सजा का प्रावधान भी बहुत ही कम है.

राजनेता-

एक जमाना था जब नेता हुआ करते थे अब तो केवल राजनेता होते हैं. जिनका सबसे ज्यादा सरोकार
वोट से होता है. भला वे 5-6 वोटों के लिए पूरे गांव का 500-600 वोट क्यों गंवाने लगे? जो पार्टी
का हितैषी हो, उन्हें  हमेंशा के लिए रुष्ट कौन करना चाहेगा? अतः डायन हत्या का अधिकतर मामला
दुर्घटना करार दे दिया जाता है.

पुलिस-प्रशासन-

पुलिस, न साधन, न रुची, न ही आवेषित भीड़ को समय पर नियंत्रित करने की दक्षता. ऐसी घटना
चरणबद्ध तरीके से होती है. अगर पुलिस-प्रशासन का सूचना तंत्र मजबूत हो तो समय पर कार्यवाही
कर जान बचाई जा सकती है. अनेक जगह पुलिस ने यह करके दिखाया भी है.

स्वयंसेवी संस्था-

डायन हत्या की घटना वहां कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए आत्मावलोकन का विषय है. कहां
रहते हैं. ग्राम संरक्षण समिति, अन्य समिति या स्वयंसेवी जिन्हें किसी आक्रोश, बैठक एवं तैयारी की
सूचना नहीं मिलती?

समाज-

समाजिक कुरीतियां बाहरी प्रयास नहीं अपितु आंतरिक प्रयास से ज्यादा सफल रहें है, अतः बुद्धिजीवियों
एवं जागरुक लोगों को और सक्रिय होने की जरुरत है. सरकार, स्वास्थ्य विभाग, आयोग आदि यदि
अपनी जिम्मेदारी समझ लें वहीं काफी होगा.

बाकी जरा सोचें!

  • क्या लोग सिर्फ अंधविश्वास के कारण ’डायन’ के अस्तित्व पर विश्वास करते हैं?
  • क्या इस अंधविश्वास का इस्तेमाल अधिकतर घटना में शोषण करने, दुश्मनी साधने, संपति हड़पने, प्रतिद्वंदी को सबक सिखाने आदि के लिए नहीं किया जाता?
  • क्या गांव के कुछ लोग अन्य ग्रामीणों को अपने फायदे के लिए झूठी कहानी सुना कर नहीं
    बहकाते हैं?
  • हाल के दिनों में पुरूषों का ’’डायन’’ के नाम पर हत्या क्या सिर्फ अंधविश्वास के कारण हो रहा
    है?
  •  ’डायन’ कुप्रथा को रोकने में सहयोग करें.

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