रांची:- भारत की अग्रणी परोपकारी संस्था एडेलगिव फाउंडेशन ने शुक्रवार को महिला उद्यमशीलता के परिदृश्य को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की. यह एक समग्रतापूर्ण और राष्ट्व्यापी अध्ययन है जिसमें महिला उद्यमियों के द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों, स्वास्थ्य पर प्रभाव, सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा और परिवार की देखरेख के नतीजे जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है. 13 राज्यों में किए गए अध्ययन से पता चला है कि अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण भारत की लगभग 80प्रतिशत महिलाएं उद्यम शुरू करने के बाद अपनी सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार महसूस करती हैं. सर्वेक्षण में शामिल महिलाओं ने कहा कि इससे उनके भीतर स्वतंत्रता और आत्मविश्वास की भावना का संचार हुआ. यह अध्ययन एडेलगिव फाउंडेशन के उदयम स्त्री अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं में उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देना और भारत में महिला आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख मार्गों में से एक के रूप में महिला उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना है. एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान इस रिपोर्ट को महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव राम मोहन मिश्रा ने जारी किया, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने की.
महिला उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए मौजूद कई सरकारी योजनाओं और नीतियों की मौजूदगी के बावजूद महिला उद्यमियों के द्वारा न योजनाओं का लाभ लेने के मामले में संख्या काफी कम है. सर्वे में शामिल महिला उद्यमियों में से केवल 1प्रतिशत ने सरकारी योजनाओं का लाभ लिया और ऐसा इसलिए क्योंकि मात्र 11प्रतिशत महिलाओं को ऐसी योजनाओं के बारे में जानकारी थी. अध्ययन के मुताबिक भारत में महिलाओं के मालिकाना हक वाले कारोबारों के पांच वर्षों में 90प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन में यह क्रमशः 50प्रतिशत और 24प्रतिशत फीसदी है.