धनबाद: World Cancer Day 2021 मन में जीने की ललक, अंदाज सकारात्मक, हौसला बुलंद तो हर रोग से टक्कर ली जा सकती है. खुशरंग जिंदगी के कुछ ऐसे ही फलसफे पर चल रहे हैं धनबाद के सर्जन डॉ. एस गोलाश. सेंट्रल अस्पताल से सेवानिवृत्त होने के बाद अब वहां अनुबंध पर कार्यरत डॉ. गोलाश ब्रेन कैंसर से पीड़ित हैं. हर छह माह में 15 दिन गामा नाइफ थेरेपी उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी है. बावजूद आज भी मरीजों का पूरी शिद्दत से इलाज करते हैं. जरूरत पर सर्जरी कर उनको जीवन देते हैं. कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं. किसी को कैंसर है तो निश्शुल्क परामर्श देते हैं.
डॉ. गोलाश बताते हैं कि हिम्मत से काम लें तो हर रोग को हरा सकते हैं. हमने भी हौसले के बल पर कैंसर को नियंत्रित किया है. ओपीडी में आने वाले हर रोगी को कैंसर के प्रति जागरूक करते हैं. संतुलित जीवन जीने के साथ योग व प्राणायाम करते हैं. जिंदगी आराम से चल रही है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में एक बार चक्कर आया. जांच करवाई तो हाइ ग्रेड ब्रेन कैंसर निकला. पर हम घबराए नहीं, बल्कि रेडियोलॉजी, कीमोथेरेपी के माध्यम से इलाज कराया. कोलकाता के डॉ. आरएन भट्टाचार्या ने ऑपरेशन किया. सोचा अब हम तो ठीक हो गए. बावजूद 2013 में सिर के दूसरे हिस्से में कैंसर मिला. अब एम्स दिल्ली से गामा नाइफ थेरेपी लेते हैं.
1959 में ग्वालियर में जन्में डॉ. गोलाश सेंट्रल अस्पताल से सीएमओ पद से 2019 में रिटायर हुए हैं. पत्नी डॉ. नम्रता भी कोयला नगर अस्पताल में सेवा दे रही है. बेटी कृति बेंगलुरु में इंजीनियर हैं. सर्जरी में विशेषज्ञता रखने वाले इस चिकित्सक का कहना है कि ओपीडी में आने वाले कैंसर मरीजों को योग व व्यायाम की सलाह देते हैं. कैंसर से लडऩे के उपाय बताते हैं. हिम्मत के सहारे इस रोग से लड़ेंगे तो आराम से 80 वर्ष या उससे अधिक का जीवन कैंसर रोगी जी सकते हैं. ब्रिटेन के एक शोध ने भी पुष्टि की है कि कैंसर के मरीज भी सामान्य जिंदगी पूरे 80 वर्षों तक जी सकते हैं. अच्छी बात है कि भारत में भी कैंसर मरीज आराम से 70 वर्षों की जिंदगी जीने लगे हैं. इलाज में हमने प्रगति कर ली है. हालांकि कैंसर का कोई स्पष्ट कारण नहीं है. पर पुरुषों में माउथ कैंसर व महिलाओं में गर्भाशय और ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा आते हैं.

