BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

वर्ल्ड हार्ट डे: रिम्स में 13 साल पुरानी मशीन से चल रहा इलाज

by bnnbharat.com
September 29, 2020
in समाचार
कैंसर पीड़ित का बिल हुआ माफ, रिम्स में किया गया भर्ती
Share on FacebookShare on Twitter

7 बार से ज्यादा रद्द हो चुका है टेंडर

मशीन के स्पेसिफिकेशन को लेकर टेंडर में होती है परेशानी

पुरानी मशीन से मरीजों के साथ डॉक्टरों को भी परेशानी

रांची: झारखंड के रिम्स में 13 साल पुरानी एकमात्र कैथलैब है. जो हर 2 या 3 महीने में एक बार जरूर खराब होती है. और इसी के भरोसे है झारखंड के 3.50 करोड़ लोगों. हृदय रोग संबंधी परेशानियों और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थिति से बचाने के लिए राज्य सरकार झारखंड राज्य के गठन होने के बाद हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर सिर्फ रिम्स में लगी मात्र एक 13 साल पुरानी कैथलैब है. ऐसे में राज्य के ज्यादातर हृदय रोगी निजी अस्पताल या फिर राज्य से बाहर जाने को विवश हैं.

दूरदर्शी डायरेक्टर डॉ ब्रिगेडियर एन एन अग्रवाल के समय लगी थी मशीन

वर्ष 2007 में FONT SYSTEMS PRIVATE LIMITED कम्पनी द्वारा लेटेस्ट कॉन्फ़िगरेशन का कैथलैब मॉडल Axiom Artis 500 लगवाया गया था. उस समय इस मशीन को OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मेन्युफेक्चरर ) द्वारा लगवाने की अनुशंसा की गई थी. जिसके बाद जर्मनी के कंपनी Siemens AG से डायरेक्ट इम्पोर्ट कर यह मशीन रांची के रिम्स में इनस्टॉल किया गया था.

7 बार से ज्यादा हो चुका है टेंडर रद्द

फिलहाल रिम्स को 3 और कैथलैब की जरूरत है लेकिन हर बार टेंडर रद्द हो जाता है. रद्द होने का मुख्य कारण मशीन का स्पेसिफिकेशन है. सूत्रों के अनुसार यह समस्या 2007 में भी थी, लेकिन उस समय के दूरदर्शी डायरेक्टर ने लेटेस्ट स्पेसिफिकेशन और डायरेक्ट ओईएम से मशीन मंगवाने की अनुशंसा कर इस समस्या का समाधान कर दिया था. लेकिन अब झारखंड के दुर्भाग्य है कि 13 वर्षो में उसके अलावा एक भी मशीन नहीं आ सकी और हर बार टेंडर रद्द होता रहा है.

सिर्फ दो कंपनियां है जो बनाती है कैथलैब मशीन

पूरे विश्व भर में सिर्फ दो कंपनियां है जो कैथलैब मशीन की ओरिजिनल मेन्युफेक्चरर हैं 1. Siemens AG जो कि जर्मनी की कंपनी है और 2. Philips जो कि हॉलैंड की कंपनी है.

क्या कहता है विज्ञान

रिसर्च कहता है अगर मरीज हार्ट अटैक आने के दो घंटे में अस्पताल पहुच जाए तो ठीक हो सकता है, लेकिन क्या झारखंड के सभी 24 जिलों के मरीजों का दो घंटे के अंदर रिम्स पहुंचना संभव है. हार्ट अटैक आने पर काफी कम मरीज समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच पा रहे हैं.

3 कैथलेब संग कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी बेहद जरूरी है

राज्य के हरेक मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी यूनिट (कैथलैब सहित) शुरू किया जाना चाहिए. रिम्स में कार्डियोलॉजी यूनिट को और बेहतर बनाया जाना चाहिए. यहां कम से कम तीन कैथलैब की आवश्यकता है. इसके अलावा नए कार्डियोलॉजिस्ट की भी नियुक्ति की जानी चाहिए. रिम्स में ही कार्डियोलॉजी यूनिट में पांच डॉक्टरों के पद खाली हैं.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

एक पत्रकार को अपराधियों ने सरेआम मारी गोली, गोरखपुर रेफर

Next Post

World Corona Update: संक्रमितों की संख्या 3.32 करोड़ के पार

Next Post
World Corona Update: संक्रमितों की संख्या 2.4 करोड़ के पार

World Corona Update: संक्रमितों की संख्या 3.32 करोड़ के पार

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d