नई दिल्ली: नए दौर में डाकिए अब चिट्ठी नहीं लाते डाकघर अब वक्त के साथ कदमताल कर रहे हैं. चिट्ठियां लाने का दौर बीत चुका है. नए दौर में अब डाकघरों के जरिए सैनिटाइजर की बिक्री भी की जा रही है. इसके अलावा गंगाजल, एलईडी बल्ब भी लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं.
कभी घर-घर डाक पहुंचाने वाले डाकिये और डाकघर अब बैंक की तरह काम कर रहे हैं. कोरोना काल में विभाग की आधार इनएबेल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) तो लोगों के लिए वरदान बन गई. घर बैठे ही लोगों ने इसके माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान किया गया. इसके अलावा सैनिटाइजर, गिलोय वटी भी विभाग बेच रहा है.
स्पीड़ पोस्ट और पार्सल में हुई बढ़ोतरी,साधारण डाक की घटी संख्या
दस वर्षों तक मुख्य डाकघर में रोजाना 1000 से 1500 डाक प्रतिदिन आती थी.यह संख्या वर्तमान में 100 से 200 हो गई है. चिट्ठी का प्रचलन नहीं रहने से भी संख्या पर खासा असर पड़ा है. फैक्स, व्हाट्स एप, ईमेल के अलावा अन्य सोशल मीडिया के माध्यमों ने साधारण डाक से भेजी जाने वाली चिट्ठियों को बीते जमाने की बात बना दिया है. नई टेक्नोलॉजी आने से डाक विभाग में काफी बदलाव आ गया है.
इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक
मुख्य डाकघर के पोस्ट मास्टर ने बताया कि डाकघर की तमाम व्यवस्थाएं ऑनलाइन हो गई हैं. इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक से ग्राहकों को बैंक की सुविधा मिल रही है. रोजाना 120 स्पीड पोस्ट हो जाती है. पार्सल की संख्या भी रोजाना 25 से 30 के करीब तक पहुंच गई है.
लोगों को दिखाए जाएंगे पुराने टिकट
प्रधान डाकघर के सहायक डाक अधीक्षक व पोस्ट मास्टर ने बताया कि जिले में एक सप्ताह तक डाक दिवस मनाया जाएगा. इसके अंतर्गत लोगों को प्रतिदिन अलग-अलग योजनाओं की जानकारी दी जाएगी.
लोगों को डाकघर में उनके बचत खाता खोलने, सुकन्या योजना खाता व पीपीएफ के खाते खोलने के लिए जागरूक किया जाएगा. पीएलआई के प्रस्ताव तैयार कराकर आरपीएलआई के प्रस्ताव बनवाएं जाएंगे. पुराने डाक टिकट व अन्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाकर लोगों को डाक विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी.

