BNN DESK: हर वर्ष पूरे विश्व में 5 दिसंबर का दिन विश्व मृदा दिवस या विश्व मिट्टी दिवस के रूप में मनाया जाता है. सबसे पहले वर्ष 2017 में पांच दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया गया था, जो उससे पहले हर वर्ष 20 दिसंबर को मनाया जाता है. दरअसल पांच दिसंबर को थाईलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यादेज के जन्मदिन पर मनाया जाता है.
राजा भूमिबोल अदुल्यादेज किसानों के बीच काफी लोकप्रिय थे और ऐसा माना जाता है कि राजा भूमिबोल ने 70 साल तक थाइलैंड पर शासन किया था. अपने शासन काल में राजा भूमिबोल ने कृषि पर विशेष ध्यान दिया था और कृषि सुधार को लेकर कई सुधार भी किए थे. ऐसा भी कहा जाता है कि राजा भूमिबोल अपने देश के हर गरीब और किसान से हर समय मुलाकात के लिए तैयार रहते थे उनकी समस्याओं को दूर करने का हरसंभव प्रयास करते थे.
विश्व मृदा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी और उर्वरा के प्रति जागरूक करना है. आधुनिक समय में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के लिए दवाओं के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त होती जा रही है. इस उद्देश्य से भी विश्व मिट्टी दिवस मनाया जाता है. हर फसल के उत्पादन में जिस प्रकार से इन दिनों कीटनाशकों व रासायनिक खादों का उपयोग हो रहा है, उससे भूमि का स्वास्थ्य खराब हो रहा है. विश्व मृदा दिवस पर मिट्टी के रखरखाव और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जाता है.
दुनिया के कई देश कृषि प्रधान है. इस मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ ने किसानों के हित के लिए कई अभियान चलाए हैं, जिनमें मृदा संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है. भारत में आधी आबादी कृषि पर निर्भर है. भारत में भी मृदा संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वस्थ धरा, हरा खेत का नारा देकर आह्वान किया किसानों के हौसले को बुलंद करने की कोशिश की है.
भारत में किसानों के हित के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें किसान फसल बीमा योजना प्रमुख है. इस योजना के तहत किसानों को सालाना तीन किश्तों में 6000 रुपए दी जाती है. इसके अतिरिक्त 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी की गुणवत्ता में विशेष सुधार के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत की थी. इस योजना से भी किसान लाभन्वित हो रहे हैं.

